भारतकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

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३६ रुद्रयामलतन्त्रम् मूल मंत्र पढे और धोबीकी लादीकी माटी ले उसकी तीन कोनकी पुतली बनावे और अंगनमें ? ।। ५६ ।। गृहे वा स्थापयेच्चैव तदा वस्त्राणि चैवहि ॥ निर्मलानि न भवन्त्येव सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ॥ ५७ ॥ वा गृहमें स्थापित कर उसके गृहमें छोडे तो वस्त्र उजले न होंय, यह मैने सत्य सत्य कहा है ॥ ५७ ॥ मंत्रः । ॐ नमोवज्रनेपातयवज्रशुरपतिआग्याहंफट्स्वाहा ॥ गंधकस्य च चूर्णं च क्षेपयेद्भोजनालये ॥ तदा सर्वाणि नश्यंति भोजनानि च सर्वशः ॥ ५८ ॥ यह मंत्र पढकर गंधकका चूर्ण रसोईमें छोड़े तो सब भोजन नष्ट होय ॥ ५८ ॥ श्वेतसर्षपमंत्रेण क्षेपयेत्क्षेत्रकेषु च ॥ ततो कीटा न जायंते निर्विघ्ना सस्यसंपदः ॥ ५९ ॥ सफेद सरसों मंत्र पढकर खेतों में छोड़दे तो कीडे न लगे नाज निर्विघ्न होय ॥ ५९ ॥ मंत्रः । ॐ नमः शुरभ्यौबलाछनपरिपतिसिलि स्वाहा । देवेभ्यो दंडवत्कृत्वा नमोच्चार्य्य पुनः पुनः ॥ सिद्धिमंत्रो ततो जातो नात्र कार्या विचारणा ॥ ६० ॥ मूलस्थमंत्रपढकर देवताओं को वारंवार नमस्कार दंडवत् करे तो मंत्र सिद्धहोय इसमें विचार न करना ॥ ६० ॥