भारतकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

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हिन्दीटीकासहितम् ४५ यह मंत्र पढकर प्रथम पूजन करे और मंत्र पढ काजर ले हाथमें तथा पावके तलवेमें लगावे तो तीन लोकका हाल जाने इसमें संशय नहीं है ॥ १ ॥ मंत्रः । ॐ ह्रीं असंभोगवतीकरन पिशाचनी प्रचंडवेगनी स्वाहा । मृद्गोमयेन शुद्धायां भूम्यामास्तीर्ययेत्कुशान् ॥ नैवेद्य च ततो दद्यान्महादेवं च पूजयेत् ॥ २ ॥ बिसोर्णं बंधयेद्धस्ते मंत्रं रात्रौ जपेत्ततः ॥ तत्रार्द्धरात्रौ देवी च ह्यागत्य सुवदेद्वचः ॥ ३ ॥ यह मंत्र जप माटी गोबरसे भूमि शुद्ध कर कुश बिछाके महादेवका पूजन करे, नैवेद्य देय कमलका सूत्र लेकर हाथमें बाँधे, रात्रिको मंत्र जपे तो अर्द्ध रात्रिको देवी आकर बातें करे ॥ २ ॥ ३ ॥ मंत्रः । ॐ आगच्छ आगच्छ चामुंडे ह्रीं स्वाहा । गोरोचनं केशरं च गोदुग्धेन समन्वितम् ॥ एतैरष्टदलं यंत्रं कमलं भूर्जपत्रके ॥ ४ ॥ मंत्र पढ़ गोरोचन केशर दुग्ध मिलाके इन वस्तुओंसे भोजपत्रपर अष्टपद्मकमल लिखे ॥ ४ ॥ मध्ये प्रतिमां बीजं च लिखेच्च सुसमाहितः ॥ मस्तके धार्यं यंत्रं च जपेत्स्वप्ने च देवताः ॥ वार्ता कुर्वंति सततं मंत्रस्य च प्रसादतः ॥ ५ ॥ मध्यमें देवीकी प्रतिमा लिखे, बीजमंत्र लिखे, यंत्रको मूंडमें धरे और मंत्र जपे तो मंत्र के प्रतापसे स्वप्नमें देवता बातें करे ॥ ५ ॥ मंत्रः । ॐ ह्रीं त्रिंचितिनी पिशाचिनी स्वाहा । कटुतुंबीमूलबीजौ दीर्घदद्रुघ्नमूलकम् ॥ ६ ॥