रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)
Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary
भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दीटीकासहितम् ४७ अघोरमंत्र मूलमें लिखा है वह पढकर गिरिजाके पतिको पूजन करे तो महादेवके प्रसादसे सिद्धि होय इसमें कुछ भी संदेह नहीं है ॥ ११ ॥ करेलापत्रमानीय द्विजवेश्मानलंदले ॥ मनुजस्य चितायां च स्थित एकाग्रमानसः ॥ १२ ॥ करेलेके पत्ते ले ब्राह्मणके घरकी अग्निको ले मनुष्यकी चिताके तीर एकाग्रचित्त करके बैठकर ॥ १२ ॥ रजकशिलिष्टमृच्चैव तथा वल्मीकसंभवा ॥ तयोर्दीपं विनिर्माय प्रज्वाल्य च प्रयत्नतः ॥ १३ ॥ धोबीकी लादीकी तथा वल्मीककी माटीका दीया बनाके प्रज्वलित करे ॥ १३ ॥ दीपप्रज्वलनमंत्रः । ॐ जुलितविधादेसाय स्वाहा । दीपस्थानमंत्रः । ॐ नमो भगवते वासुदेवाय घरधामवं धूवंधश्रीमते वसुपते स्वाहा । ॐ नमो भगवते सि- द्धसवाराय ज्वालय ज्वालय पातय पातय बंध बंध संहर संहर दर्शय दर्शय निधी- न्मे । मंत्रेणानेन दीपं च प्रार्थयेत्सुसमाहि- तः ॥ कज्जलमंत्रः । ॐ काली काली महा- काली रछदजनमोविहेंस्वाहा । कज्जलं मंत्रयेत्तेन मंत्रेण चक्षुरंजयत् ॥ अंजनकरण- मंत्रः । ॐ ह्रीं सर्वसर्वहितें क्लोँ सर्वसर्वहितें सर्व औषधीप्रानीहितेंनिरतें नमो नमः