भारतकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 52, कुल 68 में से

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५० रुद्रयामलतन्त्रम् कमलसूत्रस्य वर्त्तिं कारयेत्सुविधानतः ॥ एरंडपत्ररसेन चार्द्रयेत्तां पुनः सुखेत् ॥ २४ ॥ कमलके सूतकी बाती बनाकर एरंडके पत्रके अर्कमें भिगोके फिर सुखावे ॥ २४ ॥ अंकोलतैले प्रज्वाल्य कज्जलं समकारयेत् ॥ पुष्यर्क्षे चांजयेच्चैव त्रयोदश्यां स्वनेत्रके ॥ पृथ्वोनिखातद्रव्यं तु दृश्यते नात्र संशयः ॥ २५ ॥ और अंकोलके तेल में बाती भिगोयके दीप बारे और कज्जल ले पुष्य- नक्षत्रमें तेरसको अपने नेत्रों में अंजन करे तो भूमिमें गढ़ा द्रव्य दीखे इसमें संदेह नहीं है ॥ २५ ॥ दीपमाल्यां स्मशाने न कज्जलं च कपालके ॥ कृत्वा तु चांजयेन्नेत्रे भूद्रव्यमवलोकयेत् ॥ २६ ॥ दिवालीकी रात्रिको श्मशानमें कपालमें कज्जल करे और अंजन करे तो भूमिका द्रव्य दीखे ॥ २६ ॥ काकरारक्तसंश्लिष्टं मनः सिलसमन्वितम् ॥ तदा भूनिखातद्रव्यं चांजनेनैव दृश्यते ॥ २७ ॥ काकके रक्तमें भिगोय मनसिल ले नेत्रमें अंजन करे तो भूमिमें गढ़ा धन दीखे ॥ २७ ॥ तुलसीं शीघ्रमृतस्य पुरुषस्योदरस्य च ॥ जलमानीय यत्नेन गोरोचनं च शर्कराम् ॥ २८ ॥ तुलसी शीघ्र मरे मनुष्यके पेटका पानी, गोरोचन और शर्करा ॥ २८ ॥ एकत्र कारयेत्तां च घर्मे स्थाप्य दिनाष्टकम् ॥ नवमे दिवसे चैव कारयेदंजनं स्वके ॥ २९ ॥

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