रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)
Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary
भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें५८ रुद्रयामलतन्त्रम् बह्वाहारकथनम् । बिभीतपत्रमंत्रेण दक्षजंघेन पीडयेत् ।। तदा विंशज्जनस्यैव ह्याहारं कुरुते नरः ।। १ ।। बहेरेका पत्ता दहिनी जंघासे पीसे अरकु लगावे तो बीस जनोंका आहार भक्षण करे। मंत्रसे पत्तेका पीडन करे ।। १ ।। बिभीतपत्रं दंतं च श्वेतश्वानस्य निश्चितम् ।। कटौ बंधनमात्रेण बहुभुग्जायते नरः ।। २ ।। बहेरेका पत्ता तथा सफेद कुत्तेका दांत कमरमे बाँधे और मंत्रका जप कर सिद्ध करे तो बहुत भक्षण करे ।। २ ।। संध्यायां च समादाय ह्यमलतालस्य पुष्पकम् ।। मालां निर्माय यत्नेन कंठे कृत्वासुभोजयेत् ।। ३ ।। कौपीनमोचनं कृत्वा तदा च बहुभोजयेत् ।। ४ ।। मंत्रः ॐ नमः भूतादिपतये ग्रस ग्रस शोषय शोषय भैरवी आज्ञापयती स्वाहा । वमनं कृत्वा तु तं गृह्य शिखायां च निवेशयेत् ।। तदा बहु करोत्येव भोजनं नात्र संशयः ।। ५ ।। संध्याके समय मंत्रसे किरअरी जिसमे अमिलतास होती है तिसके फूलकी माला बनाके यत्नसे कंठमे बाँधे और कौंपीन छोडकर बहुत भोजन करे । मंत्र मूलमें लिखा है वह पढे अथवा वमन कर मंत्र से वही माला शिखामे बाँधे तो बहुत भोजन करे ।। ३ ।। ४ ।। ।। ५ ।।