भारतकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

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हिन्दीटीकासहितम् ५९ मंत्रः । ॐ नाडी वेगे उर्वशी स्वाहा । इस मंत्रका भोजनके समय जप करे । केकरस्यार्द्धक्षारस्य बीजं पिष्ट्वा गुणेन च ॥ गुटिकां बंधयेत्त्रीणि ताम्रे लौहेऽथ धारयेत् ॥ मुखे निधाय तं चैव क्षुत्पिपासा न बाधते ॥ ६ ॥ मंत्रः । ॐ सासं सरीरं अमृतभाषाय स्वाहा । केकरके बीज तथा अर्द्धक्षारके बीज पीसके मिठाईमें मिलाके गोली बाँध तीन तामे या लोहेमें यंत्र बनाकर मुखमें धारण करे तो क्षुधा या पिपासा बाधा न करे, मूलस्थ मंत्र पढे ॥ ६ ॥ कमलफलं तंडुलं शाटिकस्य च पाचयेत् ॥ अजादुग्धेन तं चापि घृतेन च स भोजयेत् ॥ तदा द्वादश दिनानि क्षुधा नैव च बाधते ॥ ७ ॥ कमलगट्टा और साठीके चावल छागीके दूधमें पकाके घी में मिला खावे तो बारह दिन क्षुधा न लगे ॥ ७ ॥ जंबोरस्य त्वचं चापि साल्लिकस्य तथैव च ॥ ८ ॥ विम्बाबीजानि संगृह्य घृतेन सह पेषयेत् ॥ एषां यो भोजयेच्चैव न क्षुधा बाधते च तम् ॥ ९ ॥ जंभोरीनींबूकी छाल तथा साल्लिककी छाल कुंदरूके बीज सबको घृतमें मिला प्रातःकाल भोजन करे तो क्षुधा न लगे ॥ ८ ॥ ९ ॥