रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)
Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary
भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें६० रुद्रयामलतन्त्रम् ददुघ्नस्य च बीजं च कशेरुं कमलस्य च ॥ मूलं गोदुग्धपक्वं च खादेन्मासं न भक्षति ॥ १० ॥ पमारके बीज कसेरू और कमलकी जड गौके दूधमें पक्वकर भक्षण करे तो एक महीना भूख न लगे ॥ १० ॥ उमरीफलपक्वं च तैलेन च समन्वितम् ॥ अंकोलेन च तं चैव खादेन्मासं न बाधते ॥ ११ उमरीके पक्के फल तेलमें मिलाके अंकोलकी छाल या तेल मिलाके खावे तो एक मासतक क्षुधा न लगे ॥ ११ ॥ क्षुधा चैव पिपासा च ह्येतत्तंत्रं प्रकाशते ॥ महादेवेन कथितं न तथान्यत्प्रभाषणम् ॥ १२ ॥ क्षुधाका तथा पिपासाका तंत्र यह शिवजीने कहा है, सत्य है ॥ १२ ॥ ॐ गणपति वीर वसे मासानजो में मांगौ सो तुम आनुपांच लडुवा सिर सिंदुर त्रिभुवन मागें चंपेके फूल अष्टकुलि नाग मोहु नो नारी बहत्तरि कोटा मोहु इंद्रकी बेटी सभा मोहु आवती आवती इस्त्री मोहु जाता जाता पुरुष मोहु डांवा अंग वसे नरंसिंहजी वने क्षेत्रपलाजें आवै मारमर करतो सो जाइ हमारे पाउ परंता गुरूकी