भारतकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

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हिन्दीटीकासहितम् ६१ शक्ति हमारी भक्ति चलौ मंत्र आदेश गुरूकी पूजयेद्घृतखंडाभ्यां गुग्गुलैर्होममाचरेत् ॥ वनसमिद्भिद्रूश्च शतं त्रिकं पंचाशच्चैककम् ॥ एतानि चाहुतिं दत्त्वा मंत्रमुच्चार्य यत्नतः ॥ १३ ॥ ऊपर लिखे मंत्रका घृत खांड गुग्गुलसे होम करे, वनकी समिधा ३५१ से होम करे, घी खांड गुग्गुल एकमें मिलाके ३५१ आहुति दे और यत्नसे मंत्र जपे ॥ १३ ॥ देवदेव महाआरण्य माता वरुण पिता शांडिल्यगोत्र वाहनभू अग्नेस्वाहा । ॐ विद्या किंल किंल कटुस्वाहा । सर्वासां सिद्धीनां स्वाहा । ॐ हंषंषं लोकाय स्वाहा । रक्त- तुंडायस्वाहा । अन्यगणेशमंत्रः । ॐ नज- गजोक्षस्वामी ॐ नजगजोक्षस्वामी । इति मंत्रं जपेच्चैव सहस्त्रैकं अष्टोत्तरं । सर्वकार्याणि सिध्यंति पृथक् पृथगुदाहृतम् ॥ १४ ॥ द्यूतविजयं नृपस्य वश्यं वचनमान्यं च सं ग्रामेऽप्यपराजितं पृथ्वीवशं तथा भवेत् ॥ १५ ॥ मनोवश्यं तथा लक्ष्मीक्षमौदास्यं याति संशयम् ॥ बुद्धि प्राप्नोति नित्यं च गणे-