भारतकोश
रूपमण्डन एवं देवमूर्त्ति-प्रकरणम् (मण्डन सूत्रधार - प्राचीन मूर्तिकला एवं देव-प्रतिमा लक्षण सटीक)

रूपमण्डन एवं देवमूर्त्ति-प्रकरणम् (मण्डन सूत्रधार - प्राचीन मूर्तिकला एवं देव-प्रतिमा लक्षण सटीक)

Rupamandanam and Devatamurti Prakaranam of Sutradhara Mandana

मण्डन सूत्रधार द्वारा

DevanagariHindipublished335 पृष्ठ

पृष्ठ 188, कुल 335 में से

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पृष्ठ 188
  • र्धेनस्तु has र्धे. So the correction र्द्धेन तु also has र्! Wait, look at the image: yes, there is a small repha merged with the matra: र्द्धेन तु or द्धेन तु? Wait, let's look at: कृष्णा(र्धेनस्तु ? द्धेन तु) or (र्धेनस्तु ? र्द्धेन तु)? Wait, look at the letter: is that र्द्धेन? Look at the top hook: it goes up and curves right: that IS a repha! And the slant goes left: that's an e-matra! So it has BOTH the e-matra and the repha: र्द्धेन तु!
  1. Line 13: कृष्णार्धे मुकुटं कुर्याज्जटाभारञ्च दक्षिणे ॥ ३३ ॥

  2. Line 14: कुण्डलं दक्षिणे भागे वामे मकरकुण्डलम् ।

  3. Line 15: अक्षमाला त्रिशूलञ्च चक्रं वै शङ्खमेव च ॥ ३४ ॥

  4. Line 16: (इत्य?इति) कृष्णशङ्करः ।

  5. Line 17: `पद्मशक्तिखेटशङ्गं मूर्त्ति(:?) स्यात् कृष्ण(तार्त्तिकः?कार्त्तिकी)

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