रूपमण्डन एवं देवमूर्त्ति-प्रकरणम् (मण्डन सूत्रधार - प्राचीन मूर्तिकला एवं देव-प्रतिमा लक्षण सटीक)

रूपमण्डन एवं देवमूर्त्ति-प्रकरणम् (मण्डन सूत्रधार - प्राचीन मूर्तिकला एवं देव-प्रतिमा लक्षण सटीक)
Rupamandanam and Devatamurti Prakaranam of Sutradhara Mandana
मण्डन सूत्रधार द्वारा
DevanagariHindipublished335 पृष्ठ
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र्धेनस्तुhasर्धे. So the correctionर्द्धेन तुalso hasर्! Wait, look at the image: yes, there is a small repha merged with the matra:र्द्धेन तुorद्धेन तु? Wait, let's look at:कृष्णा(र्धेनस्तु ? द्धेन तु)or(र्धेनस्तु ? र्द्धेन तु)? Wait, look at the letter: is thatर्द्धेन? Look at the top hook: it goes up and curves right: that IS a repha! And the slant goes left: that's an e-matra! So it has BOTH the e-matra and the repha:र्द्धेन तु!
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Line 13:
कृष्णार्धे मुकुटं कुर्याज्जटाभारञ्च दक्षिणे ॥ ३३ ॥ -
Line 14:
कुण्डलं दक्षिणे भागे वामे मकरकुण्डलम् । -
Line 15:
अक्षमाला त्रिशूलञ्च चक्रं वै शङ्खमेव च ॥ ३४ ॥ -
Line 16:
(इत्य?इति) कृष्णशङ्करः । -
Line 17: `पद्मशक्तिखेटशङ्गं मूर्त्ति(:?) स्यात् कृष्ण(तार्त्तिकः?कार्त्तिकी)