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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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८२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

इतवार के दिन को पहिले यमाई में उद्देश्य, दूसरे में चर, तीसरे में लाभ इत्यादि क्रमानुसार मुहूर्त यमाई में शोभते हैं। जैसे मंगलवार को दिनमान २९ घ.-२० प. है \div ८ = १ यमाई ३ घ. ४० प. का हुआ। मान लो इष्ट ८ घड़ी है तो ७-२० तक २ यमाई पूरे होकर तीसरा यमाई वर्तमान है। मंगलवार को तीसरा=च=चर मुहूर्त हुआ। इसी प्रकार मुहूर्त निकाल लेना।

राहु वारवैला और कालवैला

यमाई पर से और भी विचार

वाररवि वारसोम वारमंगल वारबुध वारगुरु वारशुक्र वारशनि वार
यमाई-राहु का वारवैला४ चौथा
दिन का कालवैला५ वां१-८
रात्रि ,, ,,६ छठवां१-८

यहाँ बताया है कि किस दिन के कौन से यमाई में राहु का वारवैला होता है और दिन के या रात्रि के कौन से यमाई को कालवैला कहते हैं।

नक्षत्र विषघटी

४-४ घटी की विषघटी होती है।

नीचे नक्षत्रों के आगे विषघटी दी है उससे ४ घटी आगे तक विषघटी रहती है।

नक्षत्र विषघटी चक्र

क्रम नक्षत्रघटीक्रम नक्षत्रघटीक्रम नक्षत्रघटीक्रम नक्षत्रघटी
१ अश्विनी५०८ पुष्य२०१५ स्वाती१४२२ श्रवण१०
२ भरणी२४९ आश्लेषा३२१६ विशाखा१४२३ धनिष्ठा१०
३ कृत्तिका३०१० मघा३०१७ अनुराधा१०२४ शतभिषा१८
४ रोहिणी४०११ पू. फा.२०१८ ज्येष्ठा१४२५ पू. भा.१६
५ मृगशिर१४१२ उ. फा.१८१९ मूल५६२६ उ. भा.२४
६ आर्द्रा२११३ हस्त२१२० पू. वा.२४२७ रेवती३०
७ पुनर्वसु३०१४ चित्रा२०२१ उ. वा.२०

जैसे अश्विनी नक्षत्र में ५० घड़ी उपरांत ४५ घड़ी तक या रेवती में ३० घड़ी उपरांत ३४ घड़ी तक उस नक्षत्र में विषघटी होती है। इसका विचार नक्षत्र की घटियों पर से करना। नक्षत्र जब से आरम्भ हो उसके बाद ये घटियाँ गिन कर विष घटी निकाल लेना।