सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
DevanagariHindipublished288 पृष्ठ
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अध्याय १७ : ८१
और रात्रिमान से रात्रि की यमाई की घटी निकल आती है। दिन रात में सब मिलाकर ८ यमाई होते हैं। यमाई को ही बारबेला कहते हैं। इसमें दिन और रात का पृथक् २ चौषडिया दिया रहता है और उस चौषडिया का नाम भी दिया रहता है। उसका फल नाम सद्रूष होता है। नीचे चौषडिया दिया है उसमें चौषडिया का नाम संकेताक्षर में दिया है वे ये हैं।
च=वर अ=अमृत शु=शुभ उ=उद्देश्य ला=लाभ का=काल रो=रोग ।
ये ७ ही हैं नाम सद्रूष इनका फल होता है। दिन में ७ यमाई होते हैं फिर आठवें यमाई में वही पहिला मुहूर्त आता है। इस प्रकार आगे क्रमानुसार सब मुहूर्त होते हैं।
दिन का चौषडिया
| रवि | चन्द्र | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि |
|---|---|---|---|---|---|---|
| वार | वार | वार | वार | वार | वार | वार |
| उ | अ | रो | ला | शु | च | का |
| च | का | उ | अ | रो | ला | शु |
| ला | शु | च | का | उ | अ | रो |
| अ | रो | ला | शु | च | का | उ |
| का | उ | अ | रो | ला | शु | च |
| शु | च | का | उ | अ | रो | ला |
| रो | ला | शु | च | का | उ | अ |
| उ | अ | रो | ला | शु | च | का |
रात का चौषडिया
| रवि | चन्द्र | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि |
|---|---|---|---|---|---|---|
| वार | वार | वार | वार | वार | वार | वार |
| च | का | उ | अ | रो | ला | शु |
| ला | शु | च | का | उ | अ | रो |
| अ | रो | ला | शु | च | का | उ |
| का | उ | अ | रो | ला | शु | च |
| शु | च | का | उ | अ | रो | ला |
| रो | ला | शु | च | का | उ | अ |
| उ | अ | रो | ला | शु | च | का |
| च | का | उ | अ | रो | ला | शु |
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