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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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८० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

द्विपुष्कर योगत्रिपुष्कर योग
तिथिवार
शनिवार
मंगलवार
१२रविवार
कृतिका, उत्तराषाढ़ा योग होते हैं ।

मुहूर्त—दिनमान—१५=१ मुहूर्त

मुहूर्त लगभग २ घड़ी का होता है। दिनमान के प्रमाण से उसका १५ वां भाग करना तब एक मुहूर्त होता है। दिनमान के प्रमाण से मुहूर्त २ घड़ी से कम या अधिक भी हो जाता है। दिन में १५, रात में १५, सब ३० मुहूर्त दिन रात में होते हैं।

मुहूर्त चक्र

वाररविवारचंद्रवारभौमवारबुधवारगुरुवारशुक्रवारशनिवार
कुलिक ( दुर्गुहूर्त )१४ वां१२१०
कालवेला१४१२१०
यमघंट१०१४१२
कंटक१४१२१०
यमाई१५

जैसे रविवार को १४ वां मुहूर्त कुलिक है, ८ वां मुहूर्त कालवेला है, १० वां यमघंट है इत्यादि इस चक्र के अनुसार जानो। इस चक्र में यह बताया है, कौन वार को गिनती में कौन से मुहूर्त का क्या नाम है।

मुहूर्त निकालना ।

वर्तमान वार से शनि तक गिनो२२=कुलिक} यं मुहूर्त शुभकार्य में वजित हैं ।
"बुधवार"
"गुरुवार"
"मंगल"

जैसे रविवार हैं शनिवार तक गिना=७ X २=१४ वां मुहूर्त कुलिक हुआ ।

कालवेला में यात्रा करने से मृत्यु, विवाह में स्त्री विधवा हो, व्रतबन्ध में यह योग हो तो ब्रह्महत्या होती है। इससे सब कार्यों में कालवेला वजित है।

यमाई—वारवेला

दिन में ४ प्रहर होते हैं। १ प्रहर=लगभग ८ घड़ी का होता है।

यमाई=३ प्रहर=४ घड़ी

दिनमान—८=यमाई घटी दिन की

रात्रिमान—८= , रात्रि की

दिन मान कभी-कभी २, १६ घटी का होता है। इस कारण उपरोक्त विचार में यमाई ४ घटी का बताया है परन्तु दिन मान के ठीक विभाग करने से दिनमान की