सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय १७ : ७९
| ९ | ४९ | २ | ५१ | ५९ | १६ | ३० | २४ | ६६ | २९ | ६६ | ३२ | २४ | ० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १० | ५१ | ५९ | ५४ | ३० | १७ | ० | २४ | ६६ | ३२ | ६७ | १८ | १ | महीना |
| ११ | ५४ | ३० | ५६ | ३८ | १७ | ३० | २६ | ६७ | १८ | ६९ | ३३ | २ | " |
| १२ | ५६ | ३८ | ५८ | २७ | १८ | ० | २७ | ६९ | ३३ | ७३ | ५ | ३ | " |
| १३ | ५८ | २७ | ७९ | ५९ | १८ | ३० | २८ | ७३ | ५ | ७७ | ४० | ४ | " |
| १४ | ५९ | ५९ | ६१ | १८ | १९ | ० | २९ | ७७ | ४० | ८२ | ५९ | ५ | " |
| १५ | ६१ | १८ | ६२ | २६ | १९ | ३० | ३० | ८२ | ५९ | ९० | ० | ६ | " |
अध्याय १७
पंचाङ्ग में मुहूर्त आदि के सम्बन्ध से इतर विषय भी दिये रहते हैं उनके सम्बन्ध में संक्षिप्त ज्ञान यहाँ कराया जाता है।
पंचाङ्ग में सिद्ध योग ऋकच योग आदि दिये रहते हैं वे सब मुहूर्त से सम्बन्ध रखते हैं। मुहूर्त का स्वतंत्र विषय है यहाँ तो बहुत ही संक्षेप में आवश्यक बातें दी जाती हैं, जिनका उल्लेख कभी पंचांग में आता है तो नया विद्यार्थी विचार में पड़ जाता है कि ये क्या है, इस कारण यहाँ समझाया जाता है।
पंचक
जब चन्द्र कुंभ और मीन राशियों में होता है तो पंचक होता है। अर्थात् जब धनिष्ठा नक्षत्र का उत्तराद ( अन्त का आधा भाग ) और शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती नक्षत्र पर चन्द्र होता है तो पंचक कहलाता है।
इस पंचक में काम करने का फल पचगुना होता है अर्थात् पचगुनी हानि होती है। घर छाना, प्रेत दाह, घास लकड़ी आदि इकज करना, खाट बुनना, चूल्हा बनाना आदि कार्य पंचक में करना मना है, क्योंकि कहा जाता है कि पंचक में कोई काम करने से पाँच बार बड़ी काम करना पड़ेगा। आवश्यक कार्य प्रेत दाह आदि करना होता है तो उसका फल कम करने को-पूथक विधान बताया गया है। दक्षिण यात्रा में भी यह वर्जित है।
द्विपुष्कर और त्रिपुष्कर योग
मृत्यु, विनाश, वृद्धि आदि का फल इसमें दुगुना या त्रिगुना होता है जैसे त्रिपुष्कर में कोई वस्तु घूमें तो ३ वस्तु घूमेंगी। द्विपुष्कर में कोई हानि हो तो २ बार हानि होगी। इसी प्रकार सबका विचार होता है। अर्थात् द्विपुष्कर में हानि या लाभ दुगुना और त्रिपुष्कर में त्रिगुना होता है।