भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

पृष्ठ 106, कुल 288 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 106

८८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

तिथि चार या नक्षत्र के योग से विशेष योग बनते हैं। सिद्धि योग को छोड़ कर और सब अशुभ योग हैं।

(१) सिद्धि योग, (१५) अमृत सिद्ध योग (१६) सर्वार्थ सिद्धि योग, सर्व दोष नाशक और कार्य सिद्ध करते हैं। (२) मृत्युयोग, घातक तिथियाँ हैं और सब अशुभयोग शुभ कार्यों में वर्जित हैं। (४) क्रूरक योग में तिथि और दिन मिलकर १३ होने से शुभ कार्य में वर्जित है।

(५) सम्बर्तक योग सदा वर्जित है।

उपरोक्त मृत्युयोग में १२ घटी और यम घंट में ८ घटी वर्जित करना १ उपर्युक्त अशुभ योगों में आवश्यक होने पर मध्याह्न के उपरान्त कार्य करने में अशुभता घट जाती है। यदि चन्द्र शुभ हो तो मृत्यु, क्रूरक, दग्ध आदि योगों का अशुभ फल नहीं होता। विशेष कर यात्रा में इसका विचार होता है। दुष्ट योग और सिद्ध योग एक साथ पड़े तो अच्छा योग होकर दुष्ट फल को नष्ट करता है।

आनन्द आदि योगों का ज्ञान और फल

आनन्द आदि २८ योग हैं

क्रमनामफलक्रमनामफल
आनन्दसिद्धि१५लुम्बधन क्षय
कालवृण्डमृत्यु१६उत्पातप्राण नाश
धूम्रअसुख१७मृत्युमृत्यु
घातासौभाग्य१८काणकलेश
सौम्यवृद्ध सुख१९सिद्धकार्यसिद्धि
ध्वंशधन नाश२०शुभकल्याण
केतुसौभाग्य२१अमृतराज सन्मान
श्रीवत्ससौभाग्य सम्पत्ति२२मुसलधन क्षय
वज्रक्षय२३गदअक्षय विद्या
१०मुद्गरलक्ष्मी क्षय२४यातंगकुलवृद्धि
११क्षत्रराज्यमान२५रक्ष (राक्षस)महाकष्ट
१२मित्रपुष्टि२६चरकार्यसिद्धि
१३मानससौभाग्य२७सुस्थिरग्रहार्भ
१४पद्मधनागम२८प्रवर्धमानविवाह

इन योगों को जानने की रीति

रवि को अश्विनी से, सोमवार को मृगशिर से, मंगल चार को आश्लेषा से, बुधवार को हस्त से, गुरुवार को अनुराधा से, शुकवार=३. वा., शनि=शतभिषा से गिने तो आनन्द आदि योग मिलता है। इसमें अभिजित भी गिना जाता है। नीचे चक्र में यही समझाया है।