सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 108, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ें१० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
विवरण—
योग का क्रम आरम्भ में जो दिया है वह योग का क्रमानुसार अंक है। उस क्रम में कौन योग आता है ऊपर दिया है। दिन के नीचे जो अंक हैं वे नक्षत्र के क्रम के अंक हैं। इष्ट दिन जो चन्द्र नक्षत्र हो उस नक्षत्र के क्रम का अंक उस दिन के नीचे जहाँ मिलेगा उसके बाईं ओर जो योग का अंक होगा वही क्रम के अनुसार उस दिन योग होगा।
जैसे मंगलवार को पुष्य नक्षत्र है तो उस दिन कौन सा योग होगा जानना है।
पुष्य नक्षत्र के क्रम का अंक ८ है। मंगलवार के नीचे ८ अंक खोजने से प्रकट हुआ कि सब के अन्त में ८ दिया है। ८ के बाईं ओर योग देखा तो योग का क्रम २८ मिला। २८ वॉ योग प्रबर्द्धमान होता है, इससे प्रगट हुआ कि उस दिन यह योग था। उसका फल विवाह है अर्थात् अच्छा फल है, आनन्द का दिन है।
सूर्य नक्षत्र के विशेष नाम
अश्विनी से लेकर ४ नक्षत्र तक अंतरंग इसके उपरान्त ३ नक्षत्रों की बहिर्ग संज्ञा है। इसके उपरान्त ४ नक्षत्र फिर अंतरंग कहलावेगे। इसी क्रम से वर्तमान सूर्य नक्षत्र तक गिनकर देखना कि वर्तमान नक्षत्र अंतरंग है या बहिर्ग।
अंतरंग में बाहर से घर में जाना, बहिर्ग में घर से बाहर ले जाना। पशु आदि को अवर जाना या बाहर भेजना इसके अनुसार मुहूर्त में विचार होता है।
सूर्य नक्षत्र संख्या
संज्ञा नक्षत्र
अंतरंग नक्षत्र अश्वि. भ.कृ.रो. पुष्य श्ले.म.पूषा. स्वा.वि.अनु.ज्ये. अभि.अ.ध.शत. बहिर्ग ,, मृग,आर्द्रा पुन० उफा.ह. चित्रा मृ. पूषा. ञषा. पूषा. उषा. रे समय विभाग संज्ञा
१ दिन में=१५ मुहूर्त। १ मुहूर्त=लगभग २ घड़ी का।
| दिन विभाग | प्रातः | काल | संयम | मध्याह्न | अपराह्न | सायंकाल |
|---|---|---|---|---|---|---|
| घड़ी तक | सूर्योदय से | उपरान्त | उपरान्त | उपरान्त | उपरान्त | उपरान्त |
| ३ घड़ी तक | ३ मुहूर्त तक | ३ मुहूर्त तक | ३ मुहूर्त तक | ३ मुहूर्त तक | ३ मुहूर्त तक | ३ मुहूर्त तक |
| सूर्य अस्त से(सायं) | संध्या प्रदोष | महानिशा | उपाकाल | अरुणोदय | प्रातः काल | |
| समय | ३ घड़ी तक | उपरान्त अर्द्ध रात्रि | ५५ घड़ी | ५७ घड़ी | ५८ घड़ी | |
| ३ मुहूर्त कीमध्य | में | में | में | |||
| तक | की २ घड़ी |
५८ घड़ी के उपरान्त सूर्योदय, सूर्योदय से ३ घड़ी तक प्रातः संध्या और सूर्यास्त से ३ घड़ी तक सायं संध्या भी कहलाती है।
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