भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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९८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

बुध रोहिणी नक्षत्र पर ५३-२९ में गया। धनिष्ठायाः १ चरणे बुधः ४७-११-बुध धनिष्ठा के पहले चरण में ४७-११ पर गया। शतभिषायाः २ चरणेऽर्कः=निरयन सूर्य शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण में गया। धनिष्ठायास्तृतीयचरणे सं कुम्भेऽर्कः= धनिष्ठा के तीसरे चरण में कुम्भराशि पर निरयन सूर्य की संक्रान्ति हुई। वक्रो भोमः ६-५= ६-५ में मंगल वक्रो हुआ। बुधास्त पश्चिम में=बुध पश्चिम में अस्त हुआ। सकेताक्षरों को एक बार समझ लेने पर फिर बढ़चन न होगी और ध्यान से देखते-देखते सब समझ में आने लगेंगा।

उ=उपरान्त, या=यावत् [इतने समय तक] ३० १५-४० या=भद्रा १४-४० तक रहेंगी। ३० २४-३९ उ भद्रा २४-३९ के उपरान्त होगी।

(१५) पंचाङ्ग के नीचे की ओर गोचर ग्रह कुंडली और साप्ताहिक मिश्रकालीन या प्रातःकालीन ग्रह स्पष्ट और प्रत्येक ग्रहों की दैनिक गति भी दी रहती है। किसी-किसी पञ्चाङ्ग में दैनिक [ प्रतिदिन के ] ग्रह स्पष्ट भी दिये रहते हैं।

ग्रह स्पष्ट—जब किसी विशेष समय पर गणित द्वारा प्रत्येक ग्रहों की गति के विचार में गणित कर ग्रह की ठीक स्थिति निकाल कर रखते हैं तो उससे प्रगट होता है कि कौन-कौन ग्रह उस समय कहाँ कहाँ पर है। और इसे ही उस समय का ग्रह स्पष्ट कहते हैं।

इष्टकाल—कोई समय को, जिस समय के सम्बन्ध में अपने को विचारना है उसे इष्ट समय का काल [इष्टकाल] कहते हैं। जैसे सूर्योदय के बाद ४ घड़ी पर किसी ने कोई प्रश्न पूछा तो उस समय का इष्टकाल ४ घड़ी हुई।

पञ्चाङ्ग में कोई ग्रह मिश्रकाल ४४-३६ के दिये हैं तो कहा जाएगा कि इष्टकाल ४४-३६ के ग्रह स्पष्ट हैं। यदि प्रातः काल के ग्रह स्पष्ट दिये हैं तो इष्ट ०-० का ग्रह स्पष्ट समझा जायगा।

किसी पञ्चाङ्ग में इस प्रकार ग्रह स्पष्ट दिये रहते हैं।

फाल्गुन कृष्ण ८ रवौ मिश्रमान ४४-३६—

गोचर ग्रहाः

सूचंमंबुगुशुराके
१०१११०
१६२९२२२०१४१३
१९२७१०४८१०
५९२४२४४९२०४३३४२५२५
६०८५१३८९७३
१६११५५५६१३४४२२११११

व मा

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