सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपंचांग कैसे देखना और उपयोग : १७
के सूर्य को अपने इष्टकाल (समय) का गणित से बनाना पड़ता है तब इष्ट कालीन सूर्य स्पष्ट कहलाता है। सूर्य दिन रात में जितनी कला विकला चलता है और सूर्योदय से या मिश्र काल से इष्ट तक का अन्तर निकाल कर उस अन्तर की चाल गणित से निकाल कर पञ्चांग में दिए हुए सूर्य में जोड़ने से इष्टकालीन सूर्य स्पष्ट बनता है। इसका गणित उदाहरण सहित गणित खण्ड में मिलेगा।
(१०) इसके उपरान्त प्रतिदिन के सूर्योदय और सूर्यास्त का समय घण्टा मिनट में दिया रहना है।
दिनमान से सूर्योदय या अस्त सरलता से निकल सकते हैं। दिनमान को आधा कर घण्टा मिनट बना लो तो सूर्य अस्त का समय होगा। इसे १२ घण्टा में घटा दो तो उदय का समय घण्टा मिनट में निकल आवेगा। जैसे दिनमान २६ घं १८ प०+ २=१३ घं १५ प०=५४० १५ मि० ३६ से० | १२-०-० सूर्यास्त। १२ घण्टे में से सूर्यास्त घटाया तो ५-१५-३६ सूर्यास्त ६ घं ४४ मि० २३ से० सूर्योदय हुआ। ६-४४-२४ सूर्योदय
(११) अस्त में मुसलमानी तिथि, बंगला तिथि, अंग्रेजी तारीख दी रहती है। अं=अंग्रेजी तारीख। फा=फारसी। ब=बंगला।
(१२) किसी-किसी पंचांग में विशेष योग भी दिये रहते हैं। किसी विशेष तिथि को विशेष दिन या नक्षत्र आदि पड़ने से कोई योग बन जाता है वही आनन्द योग, मृत्यु योग, चर योग, छत्र योग आदि दिये रहते हैं। इन योगों के विषय में पहिले समझा चुके हैं कि ये कब और किस प्रकार बनते हैं।
(१३) किसी-किसी पञ्चांग में सूर्य की उत्तर या दक्षिण क्रान्ति भी दी रहती है। और किसी-किसी में मिश्रकालीन दैनिक चन्द्र स्पष्ट भी दिया रहता है।
(१४) अस्त में एक सूचनापत्र सदृश प्रत्येक दिन के सम्बन्ध में कोई विशेष बात आने पर लिख दी जाती है। जैसे परवा [परिवा] या दोज को जब चन्द्र दिखेगा तो उस दिन चन्द्रदर्शन लिखा रहता है। कोई पर्व त्योहार आदि होता है या कोई जयंती होती है तो वह भी लिख दिया जाता है। अंग्रेजी महिना का अस्त होने पर दूसरा आरम्भ होने वाला महिना या सन् बदलता है तो नया सन् इत्यादि आवश्यक बातें लिखी रहती हैं।
पर्व दिन के अतिरिक्त ग्रहों के योग आदि भी दिये रहते हैं। सूर्यादि ग्रह जब १ राशि या एक नक्षत्र से दूसरी राशि या नक्षत्र पर जाते हैं तो उस दिन उसका समय भी दिया रहता है। इसके अतिरिक्त ग्रहों के उदय अस्त, ग्रहों का वक्री मार्गी होना, ग्रहण आदि और भी ग्रहों के सम्बन्ध की पूरी सूचना रहती है और आवश्यक मुहूर्त या विवाह लग्न आदि सम्बन्ध की सूचनाएँ भी रहती हैं।
कुछ संकेताक्षरों को भी समझ लेना चाहिए जिनका यहाँ उपयोग होता है। सायन मेघाडकं ८-२४ सायन सूर्य की मेघ की संक्रान्ति ८ घं २४ पल पर होगी। मेघे चाकं: ३०-४२=निरयन सूर्य की मेघ राशि की संक्रान्ति ३० घं ४२ प० पर होगी। मिथुने रवि: ६-४८=निरयन सूर्य मिथुन पर ६-४८ पर गया। रोहिण्यां बुध: ५३-२९
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