सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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कई पंचाङ्गों में गोचर ग्रह स्पष्ट जहाँ दिया रहता है उसमें चन्द्र नहीं दिया रहता तो पंचाङ्ग में उस तिथि को चन्द्र किस राशि पर है यह देखकर गोचर कुंडली में भर देते हैं।
इसी प्रकार प्रति सप्ताह पृथक्-पृथक् गोचर कुंडली और ग्रह स्पष्ट दिये रहते हैं जो लगभग अष्टमी और अमावस्या या पूर्णिमा के होते हैं।
(१६) दैनिक लग्न होरा सारिणी ( होरा=घण्टा )
किसी-किसी पंचाङ्ग में तिथि पत्र के नीचे दैनिक लग्न होरा सारिणी भी दी रहती है, जैसे काशी या जवलपुर आदि के पंचाङ्ग में दिया रहता है। सब के नीचे १ चक्र बना रहता है उसमें १५ तिथि और बार ऊपर लिखा रहता है। उसके वार्यों और बाजू से लग्न की राशियों के नाम और उसके आगे दिन और रात का समय घण्टा मिनट में दिया रहता है। इससे प्रगट होता है कि वह लग्न कितने बजे तक रहेगी। जैसे तिथि १ गुरुवार मीन ६ घण्टा २६ मिनट-मीन लग्न ६ बजकर २६ मिनट तक गुरुवार को रहेगी, उसके बाद मेष लग्न आरम्भ होगी। इस सारिणी से देखकर जान सकते हो कि उस समय कौन लग्न है। राशि की लग्न के ऊपर रा= ( रात्रि ) लिख दिया जाता है।
यूवों में क्षितिज पर जो राशि उदय हो रही है उसी को लग्न कहते हैं। २४ घण्टा में सब राशियाँ पृथ्वी के चारों ओर घूम लेती हैं। इस कारण प्रत्येक लग्न स्थूल मान से लगभग २ घण्टे की हुई। परन्तु इससे किसी का कम किसी का अधिक प्रमाण होता है।
किसी-किसी पंचाङ्ग में लग्न प्रारम्भ होने का समय होरा लग्न सारिणी में दिया रहता है। वहाँ लग्न के नाम के आगे “प्र०” ( प्रवेश ) लिखा रहता है। वह लग्न प्रवेश करने का समय है। किसी में दिन रात्रि न लिख कर मध्याह्न के उपरान्त ( १२ बजे के ऊपर ) रेलवे के समय के अनुसार १३, १४, १५ आदि २४ बजे तक लिखा रहता है। जरा ध्यान देने से सब समझ में आने लगेगा। लग्न के विषय में आगे समझाया जायगा।
तिथिपत्र के आगे पीछे पंचाङ्ग में कई उपयोगी चक्र मुहूर्त आदि विषय के दिये रहते हैं उन सब विषय का वर्णन क्रमशः उपयुक्त स्थान में करेंगे।
विवाह के १० महादोष होते हैं जो विवाह का मुहूर्त विचारने में काम आते हैं। जहाँ विवाह का मुहूर्त दिया रहता है उन दोषों के क्रमानुसार वह मुहूर्त जो दोष से रहित है अर्थात् शुद्ध है उसके लिए। ( खड़ी लकौर ) और जो दोष युक्त हैं ५ ( बेड़ी लकौर ) पंचाङ्ग में दी रहती है इसका वर्णन मुहूर्त खण्ड में मिलेगा।
(१७) पंचाङ्ग अब जगह-जगह से प्रकाशित होने लगे हैं। उन पंचाङ्गों में उस स्थान के अक्षांश और देशान्तर के अनुसार समय निकाल कर दिया रहता है। यही कारण है कि एक स्थान के पंचाङ्ग का समय दूसरे स्थान के पंचाङ्ग के समय से