सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें११६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
चित्र संख्या ७०
आकाश में लग्न से अस्त तक भाव
यदि दिन है तो सूर्य को देखो और अनुमान करो कि किस भाव में है, जैसे सूर्य को देखकर कितना बजा होगा इसका अनुमान हो जाता है इसी प्रकार इसके भी अनुमान करने का अभ्यास कर लो। जिस भाव में सूर्य हो उस भाव में सूर्य लिख कर सूर्य की राशि भी लिख दो और आगे की राशियाँ सब क्रमानुसार भर दो तो उस समय की लग्न कुण्डली बन जायगी और लग्न के स्थान में जो राशि आवे उसे लग्न समझो।
अब यह बात विचारने की है कि ६ राशियों में सूर्य उदय से अस्त तक प्रायः १२ घंटे में घूमता है, इससे एक राशि में लगभग २ घण्टे का औसत पड़ा। जैसे सूर्य ६ बजे उदय हुआ तो १२ बं भाव में न बजे, ११ बं में १० बजे, दशम में १२ बजे, (सोपहर) नवम भाव में २ बजे, अष्टम में ४ बजे और सप्तम में ६ बजे संख्या को सूर्य पहुँचैगा।
उदय काल के अनुसार समय बदलता रहता है। इस कारण सूर्य को देखकर भाव का अनुमान करना और जिस भाव में सूर्य दिखे उसी भाव में सूर्य रखकर सूर्य की राशि भी उसी भाव में लिख दो और क्रमशः आगे की राशियाँ भर दो तो ग्रह रहित लग्न कुण्डली बन जायगी।
ऊपर लग्न प्रकार २-२ घंटे का दिया है, परन्तु वास्तव में किसी लग्न का अधिक किसी का कम प्रमाण है परन्तु (१) मेष-मीन (२) वृष-कुम्भ (३) मिथुन-मकर (४) कर्क-धन, (५) सिंह-वृश्चिक (६) और कन्या-तुला इतका सदैव एक समान लग्न प्रमाण रहता है अर्थात् मेष और मीन का एक ही लग्न प्रमाण है। इसी प्रकार शेष २-२ राशियों की जोड़ी दी है उन दोनों का एक ही लग्न प्रमाण होता है।
परन्तु यहाँ पर अधिक खट-पट में न पड़कर स्पष्ट रूप से २-२ घण्टे का प्रत्येक राशि का उदय प्रमाण सिद्धान्त समझाने के लिए ही मान लिया है। सूक्ष्म रूप से इसका विचार गणित खण्ड में मिलेगा।