सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकुण्डली बनाने के लिए ज्ञान निकालना : ११५
जब ठीक अर्द्ध राशि हो तो कहेंगे कि सूर्य पाताल ( चतुर्थ स्थान ) में हैं। यदि ठीक उस समय किसी का जन्म हो तो जिस राशि पर सूर्य हो उसे चतुर्थ स्थान में लिखकर आगे की शेष राशियाँ क्रमानुसार भर देंगे तो उस समय की ग्रह रहित कुण्डली बन जायगी। यहाँ वृष का सूर्य है तो २ को चतुर्थ स्थान ( पाताल ) में रखा और शेष राशियाँ क्रमानुसार भर देने पर लगन में ११ कुंभ राशि आई तो कहेंगे कि जन्म समय कुंभ लगन थी और यही ग्रह रहित जन्मकुंडली होगी।
ऊपर के उदाहरण में सूर्य की स्थिति के अनुसार ठीक ठीक जन्म समय मिल जाने पर कुंडली बना लेना सरल हो गया था।
यदि इनके अतिरिक्त और कोई समय में किसी का जन्म हो तो कैसे लगन जानना, यहाँ बतलाते हैं।
पहिले बता चुके हैं कि एक चक्र में ३६०° और ४ समकोण होते हैं। सूर्य उदय से अस्त तक १८०° ( ६ राशियाँ ) पार करता है। ३०-३० अंश की १ राशि होती है। उदय से मध्याह्न तक ९०° का कोण बनता है और सूर्य ३ राशियाँ पार करता है। इस प्रकार उदय से अस्त तक १८०°=६ राशि पार करता है। देखो चित्र संख्या ७०।
जब सूर्य उदय होता है तो लगन पर होता है। मध्याह्न में दशम पर, संध्या को सप्तम पर होता है। इसी के अनुसार बीच के भाव कोण जान लेना। जैसे उदय से ३० अंश ऊपर सूर्य जाने पर द्वादश भाव में सूर्य पहुँचेगा। ३० अंश और ऊपर चढ़ने पर एकादश भाव में आवेगा। इसी प्रकार अस्त स्थान से ३० अंश ऊपर सूर्य है तो अष्टम स्थान में सूर्य है ऐसा कहेंगे। यदि सूर्य और ऊपर अस्त से ६०° पर मध्याह्न की ओर है या मध्याह्न से ३०° आगे बढ़ा है तो कहेंगे सूर्य नवम स्थान या नवम भाव में है।
आकाश के अर्द्ध गोलार्द्ध को जो क्षितिज के ऊपर है ६ भागों में अनुमान से विभक्त कर लो और वे ६ भाव ( स्थान ) आकाश में कहाँ कहाँ हैं बताए हुए चित्र संख्या ७० के अनुसार अनुमान करो।