सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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साय-साय वृष लग्न भी प्रातःकाल उदय होगी तब उस समय कहेंगे कि वृष लग्न का उदय हुआ है। यदि ठीक उसी समय किसी का जन्म हुआ हो तो लग्न स्थान में हम वृष राशि का सूचक २ अंक लिख देंगे और आगे की राशियाँ क्रमशः एक-एक कोठे में रखकर आगे की पूरी १२ राशियाँ क्रमानुसार भर देने पर जन्म समय की ग्रह रहित लग्न कुंडली बन जायगी। इस कुंडली में वृष लग्न है।
जब सूर्य ठीक सिर पर आता है तो हम कहेंगे कि सूर्य दशम स्थान पर आया है, क्योंकि सिर के ऊपर का ही नाम दशम स्थान है और मध्याह्न काल में सूर्य सिर पर आता है। मान लो किसी का जन्म ठीक दोपहर को हुआ है तो हम दशम स्थान में, सिर पर जो राशि हो उस राशि को रख देंगे, क्योंकि उस समय दशम स्थान में सूर्य होने से, सूर्य की वृष राशि भी दशम स्थान में रहेगी। यहाँ सूर्य वृष राशि का है तो दशम स्थान में वृष का अंक २ लिखकर वहाँ सूर्य की लिख देंगे और आगे की राशियाँ
क्रम पूर्वक आगे के कोठों में भर देंगे जैसा यहाँ बताया है। इस कुण्डली में लग्न के स्थान में ५ अंक आया है यही पाचवीं सिंह लग्न यहाँ पर जन्म लग्न हुई, और यही उस समय के जन्म की ग्रह रहित कुण्डली बन गई।
जब सूर्य अस्त होने लगता है तो कहेंगे कि सूर्य अस्त स्थान अर्थात् सप्तम स्थान पर आया है। यदि उस समय किसी का जन्म हो तो सप्तम स्थान पर सूर्य जिस राशि पर हो वह राशि लिख दो और आगे सब राशियाँ क्रमशः भर दो तो ग्रह रहित लग्न कुण्डली बन जायगी। यहाँ पर वृष राशि का सूर्य है इस कारण सप्तम स्थान (अस्त) पर वृष का २ अंक लिखा और आगे की राशियाँ भर देने से लग्न स्थान में वृषिक राशि आई। इससे प्रगट हुआ कि उस समय वृषिक लग्न थी।