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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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कुण्डली विचार : ११३

तिथि बार मास सम्बत) और जन्मसमय और जन्मस्थान अवश्य मालूम होना चाहिए। बिना समय और तिथि आदि के जाने, लगन नहीं मालूम हो सकती। कुण्डली में लगन बहुत महत्व की है, क्योंकि यदि लगन में अन्तर पड़ जायगा तो कुण्डली के फल कहने में बहुत अन्तर पड़ेगा। जितना ही अधिक सूक्ष्म समय होगा उतनी ही सूक्ष्म लगन निकाली जा सकती है।

गणित द्वारा सूक्ष्म लगन निकालने में नवीन विद्या थीं को आरम्भ में कठिनाई जान पड़ेगी। इस कारण पहिले उसका सिद्धांत बता देते हैं। सूक्ष्म रूप से लगन निकालने की विधि गणित खण्ड में मिलेगी। यहाँ प्रारम्भिक ज्ञान के लिए लगन निकालने की स्थूल रीति बतायेंगे, क्योंकि स्थूल रीति से लगन निकालना सरल है, इसी कारण पहिले उसे उदाहरण देकर समझायेंगे।

लगन जानने के पहिले यह जान लेना आवश्यक है कि सूर्य कहाँ पर अर्थात् किस राशि पर है। यह पञ्चांग में दिया रहता है। किसी-किसी पञ्चांग में प्रातः काल का, किसी में मिश्र कालीन सूर्य स्पष्ट दिया रहता है। मिश्र काल की जो घड़ी पल दी है उस समय पर सूर्य किस राशि के कितने अंश कला विकला पर है यह देखो। जिस राशि पर सूर्य होगा, पञ्चांग देखने से प्रगट हो जायगा। यदि दैनिक सूर्य स्पष्ट पञ्चांग में नहीं दिया है तो सूर्य की संक्रांति कौन है और कब हुई पञ्चांग में देखो। जहाँ मेघेऽर्कः वृषेऽर्कः इत्यादि लिखा होगा वहाँ घड़ी पल भी लिखी होगी, उससे प्रगट होगा कि अमुक तिथि को अमुक समय पर अमुक संक्रान्ति हुई है। जिस राशि पर सूर्य आता है उसी राशि की संक्रांति भी कहलाती है, इसी कारण राशि के आगे अर्कः लिखा रहता है।

सूर्य एक राशि पर लगभग एक मास रहता है और प्रतिदिन लगभग एक अंश अनुमान से चलता है। ज्योतिषी को सर्वत्र ध्यान में रखना चाहिए कि आजकल कौन राशि पर सूर्य है, और उस राशि पर कब सूर्य आया था (कब संक्रान्ति हुई थी)।

मान लो श्रावण कृष्ण २ को पञ्चांग में कर्क चाकः ३४।२ लिखा है। इस समय से कर्क राशि में सूर्य आया। अपने को श्रावण की अमावस्या को सूर्य की स्थिति जाननी है। अमावस्या तक १४ तिथियाँ होती हैं। गत २ तिथि घटाई तो शेष १३ दिन में १३° सूर्य चला। इससे प्रगट हुआ कि सूर्य अभी कर्क का ही है, केवल १३° लगभग कर्क के अभी व्यतीत हुए हैं।

जिस राशि पर सूर्य होता है वही राशि सूर्योदय पर होती है। ज्यों-ज्यों सूर्य मध्याह्न की ओर बढ़ता है उसी के अनुसार उसके आगे की लगनों का क्रमानुसार उदय होता रहता है। इस प्रकार लगन में परिवर्तन होता रहता है।

मान लो वृष राशि पर सूर्य है और समय प्रातः काल का है तो सूर्य उदय के