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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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११२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

(३) सहज—धन प्राप्त कर उसकी रक्षा के लिए पराक्रम करना पड़ता है और इस पराक्रम में सहायता देने व ले धन का बटवारा करने वाले सहोदर होते हैं। इससे इसका नाम पराक्रम और सहज पड़ा।

(४) सुख—पराक्रम होने पर घर और भाई आदि बंधुओं के सुख की भावना मन में उत्पन्न होती है। इससे इस नाम का गृह बंधु और सुख पड़ा।

(५) सुत—यह बन्धु और सुख मिलने पर पुत्र विद्या आदि प्राप्त करने की भावना हृदय में उत्पन्न होती है। विषय सुख की अपेक्षा ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना श्रेष्ठ है। ब्रह्मज्ञान विद्या से होता है इससे इसका नाम पुत्र और विद्या पड़ा।

(६) रिपु—सुत प्राप्ति का विचार होने पर इसका साधन विवाह है, इससे सन्तान के लिए विवाह करने का विचार होता है। रोगी होने से विवाह नहीं हो सकेगा। इससे शरीर को रोगहीन बनाने का विचार उत्पन्न होता है। इससे इस भाव का नाम रोगभाव पड़ा। रिपु भी रोगरूप है और कार्य में वाधक होता है। इससे इसका नाम रिपुभाव भी पड़ा।

(७) जाया भाव—रोग से निवृत्ति होने पर विवाह के लिए स्त्री प्राप्ति का विचार उत्पन्न होता है। इससे इसका नाम जाया (स्त्री) पड़ा।

(८) मृत्यु भाव—स्त्री मिलने के उपरान्त मृत्यु से रक्षा के लिए आयु बढ़ाने का विचार उत्पन्न होता है। इस कारण इसका नाम मृत्यु पड़ा।

(९) धर्म भाव—धर्म करने से ही आयु बढ़ती है और मृत्यु दूर होती है। इससे इसका नाम धर्म पड़ा।

(१०) कर्म भाव—धर्म की बढ़ती के लिए यज्ञ भजन पूजन आदि कर्म और कर्म की रक्षा के लिए पिता या राज्य का सहाय लेना पड़ता है। इससे यह कर्म-भाव हुआ।

(११) आय—कर्म करने के लिए धन आदि के लाभ की भावनाएँ उत्पन्न होती हैं। इस कारण इसे लाभ या आय भाव कहते हैं।

(१२) व्यय—लाभ होने पर उस धन को किस प्रकार व्यय करना ऐसा विचार उत्पन्न होता है। इससे इसका नाम व्यय भाव पड़ा।

अध्याय २१

कुण्डली बनाने के लिए लग्न निकालना

कुंडली बनाने के प्रयास में यह जानने की आवश्यकता है कि कौन लग्न है। और इस समय जो लग्न है वह किस प्रकार जान सकते हैं? क्योंकि बिना जन्म-समय की लग्न जाने कुंडली नहीं बन सकती। इस कारण जन्म-तिथि, महिना, सन-ईस्वी ( या