सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 129, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ेंकुण्डली बिचार : १११
एक और उदाहरण देकर समझाते हैं देखो चित्र संख्या ६९ की भाव सूचक कुंडली । यहाँ इस समय कन्याराणि उदय स्थान में है अर्थात् कन्यालग्न उदय हो रही है । इससे ठग्न, मै कन्या राशि का अंक ६ रखा, (२) दूसरे में तुला, ( ३ ) तीसरे
चित्र संख्या ६९
भाव नाम सुचक कुण्डली
उदय
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) कर्म १ आकाश घ्याल
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में वृश्चिक, (४) चौथे भाव में धन, (५) पंचम स्थान में पकर) (६) सच्छ में कुंभ, (७) सप्तम में मीन, (८) अष्टम में मेप, (९) नवम में बुष, (१०) दशम में मिथुन, (११) एकादश में ककं, (१२) द्वादश भाव में मिट राशि है । इसी प्रकार राशियों में परिबर्तन तो होता रहदा है परन्तु भाव ( स्थान ) में कोई परिवर्तन नहीं होता है ।
भाव स्थान के स्थान ( १ ) ळान=हदु स्वान ( शरीर) (२) दवितीय घन स्थान, ( ३ ) तृतीय-सहज-भातू या पराक्रम, ( ४) चढुवनमुद्दद या सु, (५) पंचम-सुत, ( ६) पष्ठ-रिपु, (७) सप्दम=्जावा, (८) अष्टमन्मृत्य, (९ ) चवमन्धमं, (१०) दशम ८ कर्म, (११ ) एकादश = आय, ( १२ ) द्वाबश= व्यय (खर्च) । इन्हीं द्वादश स्थानों को द्वादश भाव कहते हुँ। ये भाव आगे समझाये जायेंगे।
द्वादश भावों के नाम पढ्ने का कारग |
( १ ) तनु -जिस लग्म का जन्म समय उदय होता है उसका शरीर के साथ
ने शरीर या तनुभाव नाम पड़ा ।
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करने का विचार मन में उत्पन्न होता है इस कारण तनुभाव से दूसरे भाव का नाम
घन पडा ।