सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंराशियों और कालांग : १२५
के अंग और राशियों से सम्बन्ध है, इस कारण कालांग यहाँ बतलाते हैं। लग्न के विभाग के अनुसार लग्न से या मेष से क्रमानुसार गिनने पर शरीर में इन राशियों का स्थान कहाँ पड़ता है, नीचे बताया है।
लग्न मेष वृष मिथुन कर्क सिंह कन्या तुला वृश्चिक धन मकर कुष मीन या राशि
| मुख्य अंग | सिर | मुख | कंधा | हृदय | पेट | कमर | वस्ति | गुह्योन्मिष | जांघ | घुटना | टांग | पैर |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गला | बाहु | छाती | कलेजा | मूत्रपिंड | ||||||||
| Face | Arms | Breast | Stomack | Heart | Pelvis | Reins | Private parts | Thigh | Knees | |||
| neck | anus | ect | Legs | |||||||||
| Feet | ||||||||||||
ऊपर चक्र में इन राशियों या भाव का प्रभाव अंग विशेष में बताया है, परन्तु इसके अतिरिक्त ये और भी अंगों पर प्रभाव डालते हैं इस कारण इनको और भी समझाते हैं।
१ मेष—इसका प्रभाव विशेष कर मस्तक पर पड़ता है। भौंह के ऊपर के भाग पर इसका प्रभाव जानाना। सिर और भेजा, मेधाशक्ति आदि इसके अंतर्गत हैं।
२ वृष—भींह के नीचे मुख, नेत्र, चेहरा, गला इसमें शामिल हैं। इसका प्रभाव ग्रीवा ( गर्दन ) तक है।
३ मिथुन—दोनों हाथ, कंधे, भुजा, और छाती की ओर के भाग तक इसका प्रभाव है। इसका प्रभाव फेफड़े गला वाणी पर भी पड़ता है। दोनों छातियों में भी प्रभाव करता है। ग्रीवा और छाती के बीच के भाग पर इसका प्रभाव पड़ता है।
४ कर्क—हृदय, वित्त, दोनों छाती और जठर (पेट की अग्नि) पर प्रभाव पड़ता है।
५ सिंह—कुक्षि ( कूख-कोखा ), पीठ, पेट, हृदय, रक्त स्थान, कलेजा पर प्रभाव करता है।
६ कन्या—कमर, पेट की अंतर्द्वियाँ और जठर पर भी प्रभाव करता है।
७ तुला—मूत्राशय, गुदा, वस्ति, पेट; नाभि, कटि आदि पर इसका प्रभाव पड़ता है। नाभि के नीचे लिंग स्थान के ऊपर के भाग में इसका प्रभाव है। यह हाथ के पंजे पर भी प्रभाव डालता है। त्वचा पर भी प्रभाव करता है।
८ वृश्चिक—गुह्योन्मिष, मल मूत्राशय ( गुदा लिंग ) आदि पर इसका प्रभाव है।
९ धन—दोनों जंघाओं पर इसका प्रभाव है। शरीर का नाड़ी चक्र ( Artrial system ) धमनी चक्र आदि पर भी प्रभाव डालता है।
१० मकर—दोनों घुटने, हड्डी, हृद्वियों की संधि, पर प्रभाव डालता है।