सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
DevanagariHindipublished288 पृष्ठ
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१३० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान वण्ड
राशियों के भिन्न-भिन्न नाम
कभी-कभी राशियों के चालू नाम के अतिरिक्त और भी नाम ज्योतिष ग्रन्थों में उपयोग में आते हैं, उन्हें भी जान लेना चाहिए।
- १ मेघ—अज, वस्त, प्रथम, क्रिय।
- २ वृष—उत्सा, गौ, तानुरि, मुक्कम।
- ३ मिथुन—बोध, न्युगम, जिलुम, तृतीय।
- ४ कर्क—बांद्र, कुलीर, चतुर्थ।
- ५ सिंह—कंठीरव, लेप।
- ६ कन्या—पाथोन, षष्ठी, अबला, तन्वी।
- ७ तुला—जूक, वणिक, सप्तम, तौलि।
- ८ वृश्चिक—कौप्य, अष्टम, कोज, अलि।
- ९ धन—जैव, धनु, तौक्षिक, चाप।
- १० मकर—आकेकर, दशम, चक्र।
- ११ कुंभ—हृद्दरोग, घट।
- १२ मीन—रिक्त, क्षय, अन्तिम।
अध्याय २५
ग्रह विचार
भाव फल विचार करने के लिए आवश्यक बातें।
किसी भाव का फल जानने के लिए इन बातों के विचार करने की पहिले बड़ी आवश्यकता होती है।
- १—ग्रह शुभ है या पाप ग्रह।
- २—उस भाव का स्वामी कौन है।
- ३—भाव-स्वामी पाप ग्रह है या शुभ ग्रह है।
- ४—उस भाव पर कौन-कौन शुभ या पाप ग्रह की दृष्टि है।
- ५—उस भाव का स्वामी और उस भाव में स्थित ग्रह इन दोनों की मैत्री।
- ६—उस भाव में स्थित ग्रह उच्चबल ( ऊँचाबल ) या न्चबल ( नीचाबल ) का है।
- ७—वह अपने घर में है ( स्वगृही ) या मूल त्रिकोण में है।