भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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१३० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान वण्ड

राशियों के भिन्न-भिन्न नाम

कभी-कभी राशियों के चालू नाम के अतिरिक्त और भी नाम ज्योतिष ग्रन्थों में उपयोग में आते हैं, उन्हें भी जान लेना चाहिए।

  1. १ मेघ—अज, वस्त, प्रथम, क्रिय।
  2. २ वृष—उत्सा, गौ, तानुरि, मुक्कम।
  3. ३ मिथुन—बोध, न्युगम, जिलुम, तृतीय।
  4. ४ कर्क—बांद्र, कुलीर, चतुर्थ।
  5. ५ सिंह—कंठीरव, लेप।
  6. ६ कन्या—पाथोन, षष्ठी, अबला, तन्वी।
  7. ७ तुला—जूक, वणिक, सप्तम, तौलि।
  8. ८ वृश्चिक—कौप्य, अष्टम, कोज, अलि।
  9. ९ धन—जैव, धनु, तौक्षिक, चाप।
  10. १० मकर—आकेकर, दशम, चक्र।
  11. ११ कुंभ—हृद्दरोग, घट।
  12. १२ मीन—रिक्त, क्षय, अन्तिम।

अध्याय २५

ग्रह विचार

भाव फल विचार करने के लिए आवश्यक बातें।

किसी भाव का फल जानने के लिए इन बातों के विचार करने की पहिले बड़ी आवश्यकता होती है।

  1. १—ग्रह शुभ है या पाप ग्रह।
  2. २—उस भाव का स्वामी कौन है।
  3. ३—भाव-स्वामी पाप ग्रह है या शुभ ग्रह है।
  4. ४—उस भाव पर कौन-कौन शुभ या पाप ग्रह की दृष्टि है।
  5. ५—उस भाव का स्वामी और उस भाव में स्थित ग्रह इन दोनों की मैत्री।
  6. ६—उस भाव में स्थित ग्रह उच्चबल ( ऊँचाबल ) या न्चबल ( नीचाबल ) का है।
  7. ७—वह अपने घर में है ( स्वगृही ) या मूल त्रिकोण में है।