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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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ग्रह विचार : १३१

८—उस ग्रह के गुण धर्म क्या हैं ।

इत्यादि बातें विचार कर ग्रह फल कहना पड़ता है, इस कारण इन सबको आगे समझायेंगे ।

ग्रहों का शुभस्त पापत्व, स्वगृह ( अपना घर ) या भाव स्वामी विचार ग्रहों की उच्च नीच मूल त्रिकोण राशियाँ, ग्रहों की मंजी, ग्रहों की दृष्टि, ग्रहों के गुण-धर्म आदि आवश्यक बातें प्रत्येक ज्योतिषी को स्मरण रखनी चाहिए, बिना इसके जाने काम नहीं चलता ।

(१) ग्रह का शुभाशुभत्व विचार

ग्रह ३ प्रकार के हैं (१) शुभग्रह (२) पाप ग्रह या क्रूर ग्रह ( अशुभ ग्रह ) और (३) मिश्रग्रह ।

१ शुभ ग्रह benefic—गुह और शुक्र सर्वत्र शुभ ग्रह समझे जाते हैं ।

२ पाप ग्रह malefic—रवि, मंगल, शनि, राहु, केतु, हर्षल और नेपच्युन । ये अशुभ ग्रह हैं इस कारण इनको पाप या क्रूर ( दुष्ट ) ग्रह कहते हैं । ये सर्वत्र पाप ग्रह ही समझे जाते हैं ।

३ मिश्र ग्रह mixed—बुध और चन्द्र ये संयोगवश कभी पाप ग्रह कभी शुभ ग्रह समझे जाते हैं, इस कारण इनको मिश्र ग्रह कहते हैं । वास्तव में ये दोनों शुभ ग्रह ही हैं, परन्तु जब ये पाप ग्रह के साथ होते हैं तो पाप ग्रह और अकेले या शुभ ग्रह के साथ रहते हैं तो शुभ ग्रह कहलाते हैं । इनके सम्बन्ध में विशेष विचार नीचे दिया है ।

(१) बुध—यह शुभ ग्रह से युक्त ( साथ ) या दुष्ट ( शुभ ग्रह की दृष्टि उस पर हो ) या शुभग्रह से किसी प्रकार सम्बन्ध हो तो शुभ फल देता है । पाप ग्रह से युक्त या दुष्ट हो तो अशुभ फल देता है । बुध अकेला हो और अस्तंगत ( सूर्य के साथ ) न हो तो शुभ फल देता है ।

(२) चन्द्र—शुक्ल पक्ष की अष्टमी से कृष्ण पक्ष की अष्टमी तक शुभ है, इसके उपरान्त पाप ग्रह समझा जाता है । किसी के मत से चन्द्र शुक्ल प्रतिपदा से दशमी तक मध्यम बलवान होता है, परन्तु उस पर शुभ ग्रह की दृष्टि होने से बलिष्ठ होता है । शुक्ल दशमी से कृष्ण पक्ष की पंचमी तक पूर्ण बलवान होता है । कृष्ण पक्ष की पञ्चमी के आगे १० दिन तक बलहीन होता है ।

(२) ग्रहों का स्थान या स्वगृह Planetary ownership or Lord of houses स्वगृह—अपना घर । स्वक्षेत्र अपना स्थान । गृह—घर ।

यद्यपि ग्रह सूर्य के आस पास घूमते हैं, परन्तु सुविधा के लिए पृथ्वी के आसपास आकाश में चन्द्र, सूर्य, बुध, शुक्र, मंगल, गुरु, शनि क्रमानुसार घूमते हुए मान लिए गए हैं । देखो चित्र संख्या ५ ।

इन ग्रहों में सूर्य और चन्द्रमा का एक-एक अपना (निजी) घर है, और ग्रहों के