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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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१३२ : सचिन्द्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

२-२ घर राशि चक्र में हैं। इन घरों को स्वगृह कहते हैं। कौन कौन राशि किस प्रकार किस ग्रह के वांटे में आईं आगे समझाते हैं।

पृथ्वी के सबसे निकट ग्रह चन्द्र है; इसका प्रभाव सीधे मन पर अर्थात् हृदय पर पड़ता है। राशि चक्र में कालांग विषय में बता चुके हैं कि हृदय का छोटका राशि कर्क है, इस कारण चन्द्र का स्वस्थान कर्क राशि मानी गयी है।

चन्द्र के आगे सबसे शक्तिशाली ग्रह सूर्य है। सूर्य का प्रभाव आत्मा पर पड़ता है और सिंह राशि आत्मा का सूचक है, इस कारण सिंह राशि सूर्य का स्वस्थान माना गया है। कर्क के उपरान्त सूर्य की सिंह राशि आती है। सूर्य के पास बुध है इस कारण उनके दोनों बाजुओं की राशि मिथुन और कन्या इन दोनों का स्वामी बुध हुआ अर्थात् बुध को ये २ घर मिले। यह सूर्य के पास होने से बुध को युवराज कहते हैं।

बुध के उपरान्त शुक्र ग्रह है, इसे दोनों ओर की २ राशियाँ वृष और तुला मिलीं, इस कारण शुक्र इन २ राशियों का स्वामी हुआ। शुक्र के आगे मंगल है, इसे आगे की २ राशियाँ मेष और वृश्चिक मिलीं इस प्रकार इन २ राशियों का स्वामी मंगल हुआ।

इसके आगे गुरु है उसे आगे की २ राशियाँ मीन और धन मिलीं, इस प्रकार गुरु इन २ राशियों का स्वामी हुआ।

चित्र-७१ ग्रहों के घूमने का क्रम और स्वराशि

गुरु के आगे आकाश में छोर पर शनि है, इसे आजू-बाजू की शेष २ राशियाँ कृष और मकर मिलीं। चित्र संख्या ७१ और ७२ देखने से ये सब समझ में आ जायगा कि किस क्रम से कौन २ राशियों का स्वामी कौन ग्रह हुआ। चित्र संख्या ७१ में बताया है कि यह किस प्रकार घूम रहे हैं और इनको २-२ राशियों किस