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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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ग्रह विचार : १३३

प्रकार से मिली हैं। चित्र ७२ में स्पष्ट रूप से समझ में आ जायगा कि ग्रहों को किस प्रकार राशियाँ मिली हैं।

चित्र-७२ ग्रहों की स्व राशि

इस प्रकार ये राशियाँ, इन ग्रहों के स्वस्थान हुए और इन्हीं स्थानों के स्वामी ये ग्रह हुए। स्वगृह को स्वक्षेत्र भी कहते हैं। जो ग्रह अपने स्थान में होता है वह स्वगृही या स्वक्षेत्री कहलाता है।

ग्रहों के स्वस्थान या स्वक्षेत्र

गृह स्वामीसूर्यचन्द्रमंगलबुधगुरुशुक्रशनिराहुकेतुहर्षिलनेपच्यून
स्वस्थान१०१२१११२
की राशियाँ१२११

भावस्वामी या गृहस्वामी Sign ruled by the planet

जिस भाव अर्थात् जिस स्थान में ये राशियाँ रहती हैं उस भाव या स्थान के जो ग्रह स्वामी होते हैं वे ऊपर चक्र में बताये हैं। ये ग्रह स्वामी कहलाते हैं, इनको गृह स्वामी भी कहते हैं। गृहस्वामी का उदाहरण देकर समझाते हैं।

यहाँ लग्न वृषिचक्र है तो वृषिचक्र राशि का स्वामी मंगल होता है, मंगल वृषराशि में बैठता है, वृष राशि शुक्र का स्व-गृह (घर) है, इसलिए कहेंगे कि लगनेश मंगल शुक्र के