सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 165, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहों की दृष्टि : १४७
ग्रहों के पहिले, दूसरे, छठवें, ग्यारहवें और बारहवें स्थान पर कोई दृष्टि नहीं होती।
मंगल गुरु और शनि क्रमशः पृथ्वी की परिक्रमा मार्ग की परिधि के बाहर एवं सूर्य से दूर होने के कारण इनकी विशेष दृष्टि का विचार किया गया है।
ग्रह की चार प्रकार की दृष्टि होती हैं—
(१) पूर्ण दृष्टि=१° पुरी=६० कला दृष्टि
(२) त्रिपाद, =पौन दृष्टि=०°-४५' "
(३) द्विपाद, =अर्द्ध, =०-३० "
(४) एकपाद, =पाद, =०-१५ "
(१) पूर्ण दृष्टि—सम्पूर्ण ग्रह अपने स्थान से ( उस समय जिस राशि में वे हैं उस राशि से ) सातवीं राशि या सातवें स्थान पर पूर्ण दृष्टि से देखते हैं। परन्तु मंगल गुरु और शनि की विशेष दृष्टि होने के कारण इनकी अतिरिक्त पूर्ण दृष्टि इस प्रकार भी है। ये अपने स्थान से इन स्थान या राशियों पर भी पूर्ण दृष्टि से देखते हैं—
(१) मंगल ४ और ८ स्थान या राशि पर
(२) गुरु ५ और ९ " " "
(३) शनि ३ और १० " " "
(२) त्रिपाद दृष्टि=मंगल को छोड़कर सब ग्रह अपने स्थान से ४ और ८ स्थान या राशि पर त्रिपाद दृष्टि से देखते हैं। मंगल की त्रिपाद दृष्टि नहीं होती, क्योंकि यही दृष्टि मंगल की पूर्ण दृष्टि हो जाती है।
(३) द्विपाद दृष्टि=गुरु को छोड़ कर शेष सब ग्रह अपने स्थान से ५ और ९ स्थान या राशि पर द्विपाद दृष्टि से देखते हैं। गुरु की द्विपाद दृष्टि नहीं होती, क्योंकि यही गुरु की पूर्ण दृष्टि है।
(४) एकपाद दृष्टि=शनि के सिवाय सब ग्रह अपने स्थान या राशि से ३ और १० स्थान या राशि को एकपाद दृष्टि से देखते हैं। शनि की एकपाद दृष्टि नहीं होती, क्योंकि यह शनि की पूर्ण दृष्टि है।
दृष्टिचक्र
| दृष्टि | सू. च. बु. श. रा. | मंगल | गुरु | शनि | भरतार राहु | शुभ्य दृष्टि |
|---|---|---|---|---|---|---|
| पूर्ण दृष्टि | ७ वां स्थान | ७,४,८ | ७,५,५ | ७,३,१० | ५,७,९,१२ | १,२,६,११,१२ |
| त्रिपाद " | ४,८ | ० | ४,८ | ४,८ | ० | |
| द्विपाद " | ५,९ | ५,९ | ० | ५,९ | ३,९ | |
| एकपाद " | ३,१० | ३,१० | ३,१० | ० | २,१० | कन्या का= |
| अन्धा होता है। |
चारों प्रकार की दृष्टि में पूर्ण दृष्टि का ही विशेष प्रभाव पड़ता है, केतु की दृष्टि नहीं होती।