सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
DevanagariHindipublished288 पृष्ठ
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ज्योतिष-शिखा
[ प्रारम्भिक ज्ञानखण्ड ]
बुद्धि विनायक विघ्न हर, बिनवों बारम्बार । विनय करू वागीश की, विमल बुद्धि दातार ॥ १ ॥ जय महेश जिन तन लसै, वर नक्षत्र की माल । जाकी आज्ञा से भ्रमत, ग्रह आदिक अरु काल ॥ २ ॥ ग्रह प्रभाव से प्रगट हो, पूर्व जन्म का कर्म । कष्ट कटै प्रभु ध्यान से, अरु प्रगटै शुभ धर्म ॥ ३ ॥ धरू ध्यान कल्याण हित, किरपा करहु कृपाल । शीघ्र पूर्ण हो ग्रन्थ यह, दो शस्ती तत्काल ॥ ४ ॥