सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
DevanagariHindipublished288 पृष्ठ
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| चित्र | पृष्ठ |
|---|---|
| बारह राशियों के कल्पित स्वरूप | |
| ४२ मेष | ३७ |
| ४३ वृष | ३७ |
| ४४ मिथुन | ३७ |
| ४५ कर्क | ३७ |
| ४६ सिंह | ३७ |
| ४७ कन्या | ३७ |
| ४८ तुला | ३८ |
| ४९ वृश्चिक | ३८ |
| ५० धन | ३८ |
| ५१ मकर | ३८ |
| ५२ कुंभ | ३८ |
| ५३ मीन | ३८ |
| ५४ अक्षांश और देशान्तर | ३९ |
| ५५ ध्रुव की ऊँचाई का नाप | ४२ |
| ५६ इलाहाबाद में मध्याह्न में | |
| सूर्य की ऊँचाई | ४३ |
| ५७ नरासिंह पुर में मध्याह्न में | |
| सूर्य की ऊँचाई | ४३ |
| ५८ नाड़ीवृत्त, क्रांतिवृत्त, भोग | |
| और शर | ४८ |
| ५९ दूसरा उदाहरण शर भोग | |
| आदि का | ४९ |
| ६० क्षितिज, क्रांतिवृत्त, | |
| नाड़ीवृत्त ध्रुव | ५० |
| ६१ सम्पात बिन्दु | ५५ |
| ६२ क्रांति सीमा नाड़ी वृत्त | |
| आदि | ५६ |
| ६३ आकाश में पूर्व दशम अस्त | |
| पाताल | १०६ |
| ६४ आकाश की दिशाओं दर्शक | |
| चित्र | १०६ |
| चित्र | पृष्ठ |
|---|---|
| ६५ आकाश का चौकोर चित्र | १०८ |
| ६६ लग्न दशम अस्त पाताल | |
| दर्शक चौकोर चित्र | १०९ |
| ६७ आकाश में द्वादश भाव | ११० |
| ६८ लग्न कुंडली | ११० |
| ६९ भाव सूचक लग्न कुंडली | १११ |
| ७० आकाश में लग्न से अस्त | |
| तक भाव | ११६ |
| ७१ राशियों के घूमने का क्रम | |
| और स्वराशि | १३२ |
| ७२ स्वराशि दर्शक चित्र | १३३ |
| ७३ ग्रह की दृष्टि सूचक चित्र | |
| ग्रहों के कल्पित स्वरूप के चित्र | १४६ |
| ७४ रवि | १५९ |
| ७५ चन्द्र | " |
| ७६ मंगल | " |
| ७७ बुध | " |
| ७८ शुक्र | " |
| ७९ शुक | " |
| ८० शनि | " |
| ८१ राहु | " |
| ८२ केतु | " |
| ८३ ध्रूपघड़ी बनाना | १७४ |
| ८४ ध्रूपघड़ी का चक्र बनाना | १७५ |
| ८५ समय सूचक चक्र और ध्रुव | |
| का अक्षांश | १७५ |
| ८६ सू्मि पर ध्रूपघड़ी बनाना | |
| ८७ कुण्डली के भिन्न-भिन्न प्रकार | |
| और पाश्चात्य पद्धति से कुंडली | २३३-२३६ |
| ८८ दिशाओं की राशियाँ | |
| और भाव | २६७ |