सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 178, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ें१६० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
६ शुक्र से—कामदेव, स्त्री, वाहन, भूषण, सुख
७ शनि से—आयु, जीवन, मृत्यु का कारण विपत्ति !
८ राहु से—पितामह ( दादा ) का विचार ।
९ केतु से— मातामह ( नाना ) ।
अध्याय ३१
ग्रहों का प्रभाव
१ सूर्य—यह सब ग्रहों से बलवान ग्रह है, क्योंकि यह सब ग्रहों का चालक है और इसी में सब ग्रहों को तेज मिलता है । यह बहुत पद दर्शक, दैवी शक्ति, आत्मा, अर्पन देवता, सरकार राज्य दरबार आदि कार्य का कारक ग्रह है । सब राशियों में बलवान सिंह राशि का स्वामी है । यह कुण्डली में बलवान होता है तो ऐश्वर्य शौर्य, मान, कीर्ति, दैवी व नैसिक सदगुण आरोम्य, अधिकार ये सब प्राप्त होते हैं । रवि के प्रभाव से मनुष्य उदार, सत्य काम की अभिलाषा करने वाला, प्रतिभा सम्पन्न, गरीबों पर दया करने वाला होता है ।
रवि निर्बल होता है तो अभिमानी, अपनी बढ़ाई करने वाला अधिकार का दुश्-पयोग करने वाला होता है । मनुष्य शरीर में हृदय, रक्त का अभिसरण, जीवन शक्ति, हृदय का विकार, पित्त विकार, नेत्र रोग, पेट के नीचे विकार प्रगट करता है ।
२ चन्द्र—यह पृथ्वी का उपग्रह है । इसका प्रभाव कुण्डली में बहुत महत्व का है । जिस प्रमाण से यह बलवान होता है उसी अनुसार दैहिक और मानसिक बल देता है । कर्क राशि का स्वामी है । राशिचक्र में प्रमण करते समय जन्म समय या प्रसन्न काल में यह जिस राशि पर हो उसके अनुसार फल उत्पन्न करता है । जन्म समय जिस राशि पर चन्द्र हो उस राशि के अनुसार स्वभाव मानसिक प्रगल्भता आदि उत्पन्न करता है जिसका जन्म कर्क लगन में हो, लगन में चन्द्र हो तो उस पर अधिक प्रभाव करता है । वह मनोविकार के आधीन रहता है और नवीनता उसे प्रिय होती है, अर्थात् उसकी आयुष्य भर में मनोविकार को प्रधानता रहती है और उसके सम्बन्ध से अच्छे बुरे कार्य का सम्बन्ध जन्म समय के चन्द्र की स्थिति पर अवलम्बित है । चन्द्र का प्रभाव शरीर के पेट स्तन, मेढा, लाला, लालोत्पादक पिंड आदि पर होता है और उस सम्बन्धी विकार उत्पन्न करता है । पूर्ण चन्द्र शुभ होने से अच्छा है शुभ फल देता है, परन्तु क्षीण चन्द्र अशुभ ग्रह समझा जाता है ।