सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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इस लगनकुंडली पर से उसके सम्पूर्ण सम्बन्धियों का इस प्रकार विचार हो सकता है कि जिसका विचार करना है उस भाव को लगन मानकर उसी से तन धन, सहज आदि भाव क्रमानुसार गिन कर उसी से उसके सम्बन्ध का सम्पूर्ण फल निकाला जा सकता है।
जैसे स्त्री के सम्बन्ध में विचार करना है तो स्त्रीभाव ( सप्तम भाव ) को लगन मान कर उससे तन-धन सहज आदि भाव गिन कर विचारना पड़ेगा। जैसे सप्तम को लगन माना तो उससे स्त्री के शरीर आदि का विचार होगा, उससे दूसरा घर (अष्टम भाव) से स्त्री का धन, तीसरे घर ( नवम भाव ) से, उसके भाई-बहन, चतुर्थ घर ( दशम भाव ) से, उसका सुख, माता आदि का विचार होगा। इसी प्रकार सप्तम को लगन मान कर उससे पूरे १२ भाव का विचार कर, स्त्री के सम्बन्ध का फल विचार हो सकता है।
अब साठे साली का विचार करना है तो स्त्री भाव सप्तम को लगन मान कर उसके भाई बहिन जानने को सप्तम से तीसरा गिनने पर नवम भाव आया। इससे स्त्री के भाई-बहन ( साठे-साली ) का फल जान सकते हैं। इसी प्रकार साठ ( स्त्री की माँ ) का विचारना है तो चौथा घर माता का होने से, सप्तम से चौथा गिना तो दशम भाव आया, यह स्त्री की माँ ( साठ ) का घर हुआ। उससे सप्तम घर साठ के पति अर्थात् ससुर का होता है। तो दशम से चौथा घर, चौथा भाव यह ससुर का घर हुआ।
पुत्र-पुत्री का घर पाँचवाँ है। उससे सातवाँ स्त्री का और पति का घर होता है तो पंचम भाव से सातवाँ, एकादश भाव, पुत्र की स्त्री ( वह ) या लड़की का पति ( दामाद ) का हुआ। वहू की माँ ( समधिन ) जानने को एकादश भाव से चौथा घर ( धन भाव ) वहू की माँ ( ससधिन ) का घर हुआ। उससे सातवाँ ( अष्टम भाव ) उसके पति अर्थात् समधौ का घर हुआ।
तीसरा भाव भाई बहिन का है, उससे सातवाँ नवम भाव हुआ। यह भाई की स्त्री या बहिन का पति ( बहूनेई ) का घर हुआ। भाई बहिन की सन्तान जानना है तो पंचम भाव सन्तान का होने से तीसरे से पाँचवाँ घर गिना तो सप्तम भाव आया। यह भाई बहिन की सन्तान ( भतीजे ) ( भतीजी ) का घर हुआ।
पिता के भाई बहिन के बारे में जानने को पिता के दशम घर से सहज तीसरा गिना तो व्यय भाव आया। यह काका या फुआ का घर हुआ। इससे सप्तम में छठा