सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाव विचार : १७३
भाव है, वह काकी या फूफा का घर हुआ। पिता की माँ (आजी) का स्थान जानने को पिता के दशम स्थान से, चौथा स्थान लग गया, यह आजी का घर हुआ। इससे सप्तम घर सप्तम स्थान हुआ, इससे आजा का विचार होगा।
माता के स्थान चतुर्थ से चौथा घर सप्तम स्थान हुआ। यह माता की माँ अर्थात् नानी का घर हुआ, इससे सप्तम घर लग गया, यह नाना का घर हुआ।
इसी प्रकार एक ही कुंडली पर से सम्पूर्ण सम्बन्धियों के फल का विचार हो सकता है।
अध्याय ३४
ध्रुव घड़ी
जहाँ घड़ी नहीं है या घड़ी विगड़ जाने के कारण समय नहीं मालूम हो सकता, वहाँ ध्रुव घड़ी अवश्य बना लेनी चाहिए। ध्रुव घड़ी का समय सच्चा स्थानिक समय Local Time है। ध्रुव रहते रहते दिन भर का समय ठीक-ठीक जाना जा सकता है। यह व्योतिषियों के बड़े काम की चीज है, क्योंकि ध्रुव घड़ी के समय के अनुसार जो लग्न निकाली जायगी वह शुद्ध लग्न निकलेगी। इस कारण ध्रुव घड़ी का बनाना जानना चाहिए। इसके बनाने की युक्ति नीचे दी है। एक सीधा बांस लो उसे सीधा करके ( जहाँ समभूमि और खुला हुआ स्थान हो ) गाड़ दो। कई दिन तक लगातार इसकी छाया न बने दिन को देखो तो प्रतीत होगा कि इसकी छाया सदा एक ही स्थान पर नहीं रहती और थोड़ी बहुत उसकी दिशा में अन्तर पड़ जाता है। यदि उत्तर ध्रुव पर सीधा बांस गाड़ा जावे तो उसकी छाया सदा एक ही समय में एक ही स्थान पर रहेगी। कारण यह है कि उत्तरी ध्रुव पर जो बांस गाड़ा गया वह पृथ्वी की अक्षरेखा के समानान्तर होता है और धरातल जिस पर छाया पड़ती है वह अक्षरेखा से समकोण होता है। यदि किसी दूसरे स्थान पर इस प्रकार बांस गाड़ा जावे तो वह अक्षरेखा के समानान्तर नहीं होता। वह धरातल जिस पर बांस की छाया पड़ती है बांस से समकोण बनाती है, इस कारण सीधे गाड़े हुए बांस की छाया एक ही समय पर एक ही स्थान पर नहीं पड़ती।
यदि बांस समकोण पर न गाड़ कर भूमि में ध्रुव की सीध में गाड़ा जाय तो छाया में परिवर्तन नहीं होगा। ध्रुव का कोण जिसकी सीध में बांस गाड़ा गया है उस स्थान का अक्षांश सूचक है अर्थात् उस स्थान के अक्षांश के कोण के अनुसार