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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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१७४ : सचित्र ज्योतिष शिखा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

यदि उस बांस का झुकाव ध्रुव की ओर हो तो वह बांस ध्रुव की सीध में हो जायगा और आस पास जहाँ बांस की छाया पड़ती है, समय सूचक चिन्ह बना देने से पशु घड़ी का काम देगा। इसी सिद्धान्त पर घूघ घड़ी बनी है।

घूघ घड़ी बनाने के लिए गोल पुट्टे का टुकड़ा लो उसमें समान २४ भाग बना कर घंटे का निशान लगा दो जिससे २४ निशान २४ घंटा बन जायेंगे। फिर एक सलाई उस पुट्टे के ठीक बीचों बीच इस प्रकार छेद कर लगा दो कि वह पुट्टे के समकोण में रहे। फिर उस सलाई की एक नोक ध्रुव की ओर करके उसे जमीन में इस प्रकार गाड़ दो या जमा दो कि सलाई भूमि में उस स्थान के अक्षांश के बराबर कोण बनाये। उस सलाई की छाया समय सूचक अंकों पर पड़ने से वहाँ का ठीक समय ज्ञात होगा। जैसे चित्रसंख्या ८३ में बताया है, समय सूचक अंकों पर सलाई की जहाँ छाया पड़ेगी उसी के अनुसार स्थानिक समय होगा।

चित्रसंख्या ८३ देखो यहाँ गोल पुट्टे में बाहर की ओर समय सूचक घंटों के चिन्ह बने हैं। आगे आवश्यक न होने से और भी घंटों के अंक नहीं लिखे गये हैं। मध्यान्द्र के १२ बजे का चिन्ह सबसे नीचे रहता है। यह घूघघड़ी २८° के अक्षांश के स्थान पर समय बतायेगी।

भीतर की ओर १५-१५ अंश के अन्तर पर अंश के चिन्ह लगाकर अंश लिखे हैं। एक घंटे के भीतर १५-१५ मिनट के ४ कोटि बने हैं। यहाँ स्थानाभाव के कारण और विभाग नहीं किये गये। इन प्रत्येक कोटों के ३-३ और विभाग करने से प्रत्येक विभाग ५-५ मिनट का बन जायेगा।

अब घूघघड़ी को कहीं स्थापित करने के लिए स्थाई बनाना है तो इस प्रकार बनायेंगे-

चित्र संख्या ८३ घूघघड़ी

एक त्रिकोण इस प्रकार बनाओ जिसका एक कोण अपने स्थान के अक्षांश के बराबर हो और उसे किसी सम चबूतरे पर इस प्रकार पक्की तौर पर जमा दो कि