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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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१७६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

संख्या ८५ में बनाया है। चक्र में जो १२ वज्रे के स्थान में केन्द्र तक फँसाने के लिए पहिले काट लिया गया था, उसी कटे हुए स्थान को त्रिकोण में फँसा कर जमाना चाहिए जिससे त्रिकोण के दोनों ओर उस चक्र का भाग निकला रहे। इसी चक्र में जिस स्थान पर त्रिकोण की छाया पड़ेगी, वहाँ बनाये हुए चिन्ह के अनुसार समय घंटा मिनट में जाना जा सकेगा।

चक्र को त्रिकोण में फँसाने के लिए यदि आधा त्रिकोण का भाग और आधा चक्र का भाग काट कर फँसाया जाय तो अच्छा अम जाता है और इसे त्रिकोण में जमाते समय इस बात का ध्यान रहे कि त्रिकोण और चक्र के बीच दोनों ओर समकोण रहे।

फिर इस त्रिकोण को किसी लकड़ी के छोटे पटिया पर जमा दो। वस यही धूप घड़ी बन गई। समय देखने के लिए इसे सदैव इस प्रकार रखना चाहिए कि त्रिकोण का ऊपरी किनारा और नोक ध्रुव की सीध में रहे।

अध्याय ३५

१ बिना पंचाङ्ग के तिथिज्ञान

यदि पंचाङ्ग पास न हो तो स्थूल रूप से तिथि वार नक्षत्र आदि का ज्ञान किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है यह नवीन विचार्यों को जानना आवश्यक है। इस कारण इन सबके जानने की रीति यहाँ बतलाते हैं।

इन विधियों से स्थूल ज्ञान ही होता है। सूक्ष्म ज्ञान तो गणित द्वारा ही होता है, इसका सूक्ष्म ज्ञान गणित-खण्ड में मिलेगा। यहाँ तो प्रारम्भिक ज्ञान की बातें बताई जायेगी।

पहिले बता चुके हैं कि किस-किस मास की पूर्णमासी को कौन-कौन नक्षत्र पड़ते हैं, उनको स्मरण रखना चाहिये।

१ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ १० ११ १२ मास चैत्र वैशाख ज्येष्ठ आषाढ़ श्रावण भा. प. आश्विन कार्तिक मार्ग शेष माघ फाल्गुन नक्षत्र चित्रा वि. ज्येष्ठा पू. रा. श्रवण. पू. भा. अश्वि० कृत्ति० मृग० पुष्य. मघा. उ.फा.

जिस दिन की तिथि जानना है उस दिन का नक्षत्र मालूम करो। फिर पूर्णमासी के आगे जो नक्षत्र हो उससे इष्ट दिन के नक्षत्र तक गिनो। जो संख्या हो, कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से उतना गिन कर तिथि कह दो। कभी-कभी तिथि में क्षय वृद्धि होने

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