सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसायन सूर्य जानने की स्थूल रीति : १८९
इस चक्र से किसी ग्रह की राशि अंश कला आदि मालूम हो तो उसका नक्षत्र और चरण भी जाना जा सकता है।
जैसे जन्म समय चन्द्र स्पष्ट १२।२९°-५२' है तो यह जानने के लिए कि जन्म नक्षत्र और चरण क्या होगा, होड़ा चक्र का अन्तिम भाग देखो। १२।२६°-४०' तक धनिष्ठा का पहला चरण गत हो चुका, धनिष्ठा का दूसरा चरण १०।०°-०° तक है। अपना चन्द्र इन दोनों के भीतर है इससे यह प्रगट हुआ कि धनिष्ठा के दूसरे चरण का जन्म है।
नक्षत्र का चरण (जैसे नाम से प्रगट हो जाता है) जान लेने पर इसी चक्र द्वारा चन्द्र की राशि अंश आदि भी विदित हो सकता है।
जैसे किसी का जन्म धनिष्ठा के तीसरे चरण का है तो तीसरे चरण धनिष्ठा का १३।३°-२०' तक है। दूसरा चरण १०।०°-०' तक है। इस कारण चंद्र इन दोनों के बीच है ऐसा समझना। चंद्र की ठीक स्थिति तो गणित करने से ही प्रगट होती है। यहाँ केवल मोटा हिसाब बतलाया है। गणित खण्ड में इसका गणित दिया है।
होड़ा चक्र को अब कहड़ा चक्र या शतपद चक्र भी कहते हैं।
१ चरण (नक्षत्र का) ३°-२०' का होता है। आगे ३°-२० जोड़ते जाने से राशि के अंशादि का चक्र बन जाता है।
इसमें एक अक्षर को लेकर प्रत्येक चरण के लिए पृथक् मात्रा लगा कर चरण के अक्षर बनाये गये हैं। जैसे ल से ला, ली, लू, ले, लो इत्यादि जैसा नीचे के चक्र से प्रगट होगा।