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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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१८८ : सचित्र व्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

होता है और अथिनी से आरम्भ होता है। जैसे चंद्र मकर का २९°-५२' है। = ९२-२९°-५२' = १७९९२" ÷ ८००' = २२ गत नक्षत्र (श्रवण) वर्तमान २३ वां नक्षत्र धनिष्ठा का २ चरण।

रा. अं. क.८००' ) १७९९२" ( २२ गत नक्षत्र
९-२९-५२१६००
× ३०१९९२
२७०१६००
+ २९३९२
२९९× ४
× ६०८०० ) १६६८ ( १ गत
१७९४०८०० चरण
+ ५२७६८ शेष
१७९९२ विकला= वर्तमान दूसरा चरण हुआ

किसी राशि के नाम पर से जन्म नक्षत्र और चरण जानना—

आगे होड़ा चक्र दिया है जिस पर से हिन्दुओं के नाम विचार कर रखे जाते हैं। प्रत्येक नक्षत्र के ४ चरण होते हैं और प्रत्येक चरण के लिए एक अक्षर नियुक्त है। जन्म समय जो नक्षत्र होता है उस नक्षत्र का जो चरण वर्तमान हो उसी चरण के अक्षर के अनुसार नाम रखा जाता है। जैसे किसी का जन्म शतभिषक नक्षत्र के तीसरे चरण में हुआ तो चक्र में देखने से प्रगट हुआ कि शतभिषक के तीसरे चरण का अक्षर 'सी' है। इसी अक्षर पर से सीताराम, शिगुपाल आदि नाम उस वालुक का रखा जावेगा। स अक्षर में श अक्षर भी लिया जा सकता है। वह ह्रस्व हो या दीर्घ हो उसका कुछ विचार नहीं होता। यहाँ सी अक्षर है इसमें "छोटी इ" की भी मात्रा हो तो कोई अन्तर नहीं पड़ेगा। इसमें केवल अक्षर और मात्रा का विचार होता है। मात्रा ह्रस्व हो तो उसे दीर्घ भी ले सकते हैं जैसे कू और कु एक है। इसी प्रकार म और मा एक है। मचा के पहले चरण का जन्म होता है म अक्षर है तो मक्खन सिंह या माशती प्रसाद भी नाम रख सकते हैं।

कई अक्षर ऐसे भी हैं जिन पर से नाम नहीं रखा जा सकता है जैसे ड. ल. ण. जव ये अक्षर आते हैं तो नाम "न" अक्षर या किसी दूसरे अक्षर से रख देते हैं।

इसी प्रकार किसी राशि के नाम पर से नाम के आदि अक्षर का विचार कर जन्म नक्षत्र या राशि भी जान सकते हैं। जैसे किसी का नाम रामलाल है। नाम का आदि अक्षर रा है। चक्र देखा तो तुला राशि के आगे चित्रा के तीसरे चरण का जन्म है और तुला राशि है।