सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसायन सूर्य जानने की स्थूल रीति : १८७
कारण साधारण रीति से अधिक बड़े हुए अंश ऊपर जोड़ना बताया है। इस रीति से चन्द्र स्पष्ट करने में १° के लगभग अन्तर पड़ जाता है, परन्तु ३° से अधिक अन्तर नहीं आता। तिथियाँ १ मास में पूरी ३० नहीं होती। इससे ये अंश बढ़ जाते हैं।
जैसे सन् १९४३ में २५ मई को तदनुसार ज्येष्ठ वद्यी ६ को १२ बजे दिन का चंद्र साधन करना है। १२ बजे दिन अर्थात् सूर्योदय से लगभग ६ घंटा हुआ।
२१ मई को सायन रवि=मिथुन १° गति ५८' इष्ट २५ मई का है। आगे का होने से चालन घन हुआ।
( २५ मई-२१ मई ) = ४ दिन X ५८' गति=२३२'=३° - ५२'=३° - ५२'-०'अंश २४ घटा में ५८' गति तो ६ घंटा में=५८'=१४३' +०-१४-३०
रा-०
२१ मई को सूर्य २-१°-०' + चालन ०-४-६३'
४-६॥ चालन +
=सायन सूर्य=२-५-६३'
रा ०
६ तिथि है=गति तिथि ५=५ X १२°=६०°=२-०° + पंचमी के अन्त =२-०-०
तक चन्द्र योग ४-५-६३'
+०-३-०
पंचमी की बढ़ती के अंश
+०-३-०
छठ ,, ,, "
योग=४-११-६३' ( क्योंकि छठ उदय है )
६ घंटा का + =३-३० २४ घंटा में चन्द्र १४ अंश चला तो ६ घंटा में
चन्द्र स्पष्ट=४-१५-३६५' ७ १४ X ६ ७° २४ = ३°-३०' ४२
∴ इष्ट कालीन सायन चन्द्र स्पष्ट ४-रा १४°-३६५°
यह कुछ मोटा हिसाब है। गणित से १-२ अंश का अन्तर पड़ जाता है। सायन चन्द्र से अयमांश घटा दो तो निरयन चन्द्र होगा।
चंद्र से नक्षत्र और उसका चरण साधन करना
चंद्र स्पष्ट की राशि आदि की कला बना कर १३ अंश-२०'=८००' का भाग दो तो लब्धिगत नक्षत्र होगा। शेष में ४ गुणाकर ८००' का भाग दो तो वर्तमान नक्षत्र का चरण निकलेगा। १ नक्षत्र में ४ चरण होते हैं। सायन नक्षत्र १३°-२०' का