सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 204, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ें१८६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
चंद्र साधन करने का दूसरा उदाहरण
तारीख २५ मई के ६ बजे संध्या का चन्द्र स्पष्ट करना है; ज्येष्ठ कृष्ण पञ्चमी का।
२१ मई की सूर्य-मिथुन १ अंश गति ५८'=इष्ट-२५ मई को ६ बजे संध्या= चालन+ (२५ मई-२१ मई)=४ X ५८' गति=२३३'=३अंश—५२ चालन+। ६ बजे संध्या इष्ट है। मान लो सूर्योदय ६ बजे है, ६ बजे से १२ घण्टा हुआ। २४ घण्टा में ५८' तो १२ घण्टा में २९' गति हुई। इन सबको जोड़ा तो इष्ट कालीन सायन सूर्य स्पष्ट २ रा-५अंश-२१' हुआ।
सूर्य मिथुन १ अंश=रा-१अंश-०'
चार दिन का चालन+०-३-५२
१२ घण्टे का ,, +०-०-२९
इष्ट कालीन } =२-५-२१
सूर्य स्पष्ट }
तिथि ज्येष्ठ ५ है=शुक्ल पूर्णिमा=१५+कृष्ण पञ्चमी तक गत तिथि ४=१५+४=१९ दिन।
१ तिथि में १२' तो १९ तिथि में=१९ X १२ अंश=२२८ अंश=३ रा. १८ अंश रा ० ,,
सायन सूर्य-२-५-२१ १ दिन की चन्द्र की मध्यम गति (औसत गति) १४°
तिथि के अंश+७-१८-० है तो १२ घण्टा ( ३ दिन की ७°
=चन्द्र स्पष्ट=९-२३-२१=चतुर्थी के अन्त तक का।
आधे दिन का+२-०-७-०
इष्ट कालीन } =१-०-०-२१=कुंभ के ०°-२१' पर चन्द्र है।
सायन चंद्र स्पष्ट } =इष्ट कालीन सायन चन्द्र कुंभ के ०°-२१' पर है।
चंद्र साधन करने की दूसरी रीति—
चंद्र की मध्यम गति १२ अंश है कोई १४ अंश लेते हैं। रवि और चंद्र में १२° अंश का अन्तर पड़ने पर १ तिथि होती है, शेष २ अंश मध्यम गति के हैं। उसके मिला देने से चंद्र के अंश ज्ञात हो जाते हैं।
अधिक मध्यम गति का अन्तर इस प्रकार से होता है।
तिथि प्रतिपदा द्वितीया तृतीया चतुर्थी पंचमी पञ्चमी से द्वादशी शेष तिथि में
| अन्तर | २° | ४ | ६ | ५ | ३ | ३ | २° |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तिथि पूर्णिमा से | एकादशी से | ||||||
| कृष्ण पञ्चमी तक अमावस्या तक | चंद्र स्पष्ट करने के लिए | सूर्य स्पष्ट में | |||||
| अन्तर | ३ अंश | ३ अंश | तिथि के अनुसार ये अंश मिला देने चाहिए। चंद्र की गति प्रति दिन १२ अंश के १५ तक २° बढ़ जाती है। इसी के |