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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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सायन सूर्य जानने की स्थूल रीति : १८५

\begin{array}{r} \text{सूर्य ( वृष १° )} = \text{रा } ० \ १ \\ \qquad \qquad \qquad १ \ १ \ ० \\ ५ \text{ दिन का चालन} + = ० \ ४ \ ५५ \\ \hline \text{योग} = १ \ ५ \ ५५ \\ १० \text{ घंटे का} + = ० \ ० \ २५ \\ \hline = १ \ ६ \ २० \end{array}

इष्ट कालीन सायन रवि

तिथि शुक्ल प्रतिपदा से गिनी जाती है। पूर्णिमा को १५ और अमावस्या को ३० तिथि होती है। अपनी इष्ट तिथि—बैगाख कृष्ण ५ है—१५ शुक्ल पक्ष के १५ गत तिथि कृष्ण पक्ष के—(१५ + ५) = २० + १ = २१ गत तिथि।

१ तिथि = १२° तो २१ तिथि = २१ × १२ अंश = २५२ अंश = रा. १२ अंश

\begin{array}{r} \text{सूर्य स्पष्ट} \quad \text{रा } ० \ ' \\ \qquad \qquad \qquad १ \ ६ \ २० \\ \text{गत तिथि} = ८ \ १२ \ ० \\ \hline \text{प्रातः चन्द्र स्पष्ट} = ९ \ १८ \ ० \\ \hline = \text{मकर का } १८^{\circ} - २०' \end{array}

यह पञ्चमी को सूर्योदय पर चन्द्र की स्थिति हुई और प्रातः काल का सायन चन्द्र हुआ।

चन्द्र की दैनिक गति १२ अंश से १५° तक है अर्थात् साधारण प्रकार से मध्यम गति १४ अंश है। २४ घण्टा में १४ अंश गति है तो आधे दिन की संख्या तक ७ अंश हुई है। १ घण्टा में लगभग ३५' गति हुई। यहाँ ४ बजे संख्या की गति निकालनी है। मान लो सूर्योदय ६ बजे हुआ तो सूर्योदय से इष्ट काल तक १० घण्टा हुआ। १ घण्टा में ३५' तो १० घण्टा में = ३५' × १० = ३५०' = ५ अंश — ५०' गति हुई। यहाँ चालन + है।

\begin{array}{r} \text{रा } ० \ ' \\ \text{प्रातः चंद्र स्पष्ट} \quad १ - १८ - २० \\ १० \text{ घण्टे का चालन} + ० - ५ - ५० \\ \hline \text{इष्ट कालीन} \quad \left. \vphantom{० - ५ - ५०} \right\} = १ - २४ - १० \\ \text{सायन चंद्र स्पष्ट} \quad \left. \vphantom{० - ५ - ५०} \right\} = \text{मकर का } २४ \text{ अंश} - १०' \end{array}

इस प्रकार ४ बजे तक चंद्र मकर के २४ अंश—१०' पर हुआ। यह स्थूल मान से चन्द्र स्पष्ट हुआ। सूक्ष्म रीति से गणित करने में लगभग ११ कला का अन्तर पड़ जाता है।

( सायन चन्द्र—अयनोश ) = निरयन चंद्र।