सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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सौर मास | संक्रान्ति (अर/म) | संक्रांति की तारीख | इसके आगे दिन का हिसाब ---|---|---|--- १ वैशाख | मेव | १३ अप्रैल | लगाने से सौर मास की तारीख २ ज्येष्ठ | वृष | १४ जुलाई | ( तिथि ) जानी जा सकती है । ३ आषाढ़ | मिथुन | १४ जून | अर्थात् इस प्रकार बताई हुई ४ श्रावण | कर्क | १६ जुलाई | तारीखों के आगे गिनने पर सौर ५ भाद्रपद | सिंह | १६ अगस्त | मास की तिथि किसी भी इष्ट दिन ६ आश्विन | कन्या | १६ सितम्बर | की निकाल सकते हो । इसमें भी ७ कार्तिक | तुला | १७ अक्टूबर | कभी-कभी एक दिन का अन्तर ८ मार्गशीर्ष | वृश्चिक | १६ नवम्बर | पड़ जाता है । यहाँ अंग्रेजी तारीख ९ पौष | धन | १५ दिसम्बर | के हिसाब से कौन संक्रांति उस १० माघ | मकर | १३ जनवरी | समय होगी यह साधारण प्रकार से ११ फाल्गुन | कुंभ | १२ फरवरी | जानी जा सकती है । १२ चैत्र | मीन | १५ मार्च |
स्थूल रीति से विना पञ्चभाग के चन्द्र साधन ( चन्द्र स्पष्ट करना )
जन्म समय पर किसी ग्रह की ठीक स्थिति इष्टकाल तक गणित द्वारा निकालने से जो जानी जाती है उसी को ग्रह स्पष्ट करना कहते हैं और उस ग्रह के स्पष्ट करने के गणित को साधन ( साधन करने की विधि ) कहते हैं ।
ऊपर सायन सूर्य का साधन करना ( विना पं गङ्ग के ) बताया है, उन्हीं प्रकार यहाँ चन्द्र का साधन करना भी बताते हैं ।
सूर्य और चन्द्र में जब १२ अंश का अन्तर पड़ जाता है तब एक तिथि होती है । इस कारण चन्द्र स्पष्ट करने के लिए उस समय का सूर्य स्पष्ट कर लेना आवश्यक है ।
जैसे वैशाख कृष्ण पंचमी ता० २५ अग्रेल सन् १९४३ ई० के ४ बजे संध्या समय समय चन्द्र स्पष्ट करना है ।
पहले इस दिन का सूर्य स्पष्ट करेंगे । वैशाख में २० अग्रेल को वृष के १ अंश पर चक्र में सायन सूर्य दिया है और गति ५९ कला है । ( २५ अग्रेल-२० अग्रेल ) = ५ X ५९' गति=चालन धन (इष्टकाल पंक्ति के आगे होने से)+हुआ ५ X ५९'=२९५'=२९ अंश-४५' चालन+इष्ट ४ बजे संध्या का है=(१२+४)=१६ बजे इष्ट । यह समय सूर्योदय के बाद का है । मान लो सूर्योदय ६ बजे हुआ । (१६ घण्टा-६ बजे सूर्योदय) १० घण्टा इष्ट । २४ घण्टा में ५९' गति तो १० घण्टा में = ५९ X १० = ५९५' २५ कला के लगभग ।
इन सब को जोड़ा तो इष्ट काल में सायन स्पष्ट रवि=ता १-६अंश-२०'-०' हुआ=(वृष के ६ अंश-२०')