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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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सायन सूर्य जानने की स्थूल रीति : १८३

परन्तु अपनी तारीख २१ मार्च के पहिले की है। इस कारण यहाँ चालन श्रृण हुआ। वक्र में जो दिया है उसे पंक्तिस्थ ( जो पंक्ति में है ) या वक्रस्थ कहते हैं। अब पंक्तिस्थ २१ मार्च के सायन सूर्य को लिया। वह भेद १° पर है = रा ०-१५' इसमें

रा.अं. क. | | से चालन २°-५७' ( चालन श्रृण होने से ) घटाया तो भेद रहा ---|--- ०-१-० ०-२-५७ = ११-२८-२

स्पष्ट सायन सूर्य

गणित करने से इष्ट समय का ग्रह आदि निकलता है उसे स्पष्ट ग्रह आदि कहते हैं।

इष्ट कालीन सायन रवि स्पष्ट ११ रा २८° ३' में यदि २° ५७' जोड़ दिया जाय तो वही ० रा १° सायन रवि २१ मार्च का आ जाता है।

यदि घंटा भी दिया है तो उतने घंटे की गति निकाल कर उस चालन का भी + ( धन श्रृण जैसा आवश्यक हो ) करो। घंटे की गति श्रं'राशिक से इस प्रकार निकालेंगे — ६० घड़ी ( एक दिन रात ) में सूर्य की गति उस दिन ५९' ( या जा गति हो ) भी इनमें घड़ी में ( इष्ट घड़ी में ) कितनी होगी ? घंटा की घड़ी बना लो।

जैसे ५ घड़ी की गति निकालनी है ६० घड़ी में ५९' तो ५ घड़ी में

५९ X ५=५९=४' - ५५"गति हुई। मान लो १८ मार्च को१२) ५९ ( ४'
६०=१२४८

सूर्योदय के आगे ५ घड़ी की और गति जाननी है तो इष्ट दिन के बाद की गति होने से जोड़ना पड़ेगा। पहिले का समय होता तो चालन घटाना पड़ता। १८ मार्च के

सूर्य में घड़ी की गति और जोड़ा तो योग ११ रा २८° ३४' ५५" हुआ। अर्थात् उस समय मीन के २८° ३४' ५५" पर सूर्य होगा। सूक्ष्म गणित करने पर १०-१५ कला का अन्तर आ जाता है।

| रा | ° | ' | " ---|---|---|---|--- १८ मार्च को सूर्य | ११ | २८ | ३० | ० + ५ घड़ी और | ० | ० | ४ | ५५ योग= | ११ | २८ | ३४ | ५५

यह इष्ट काल का सायन सूर्य

सायन सूर्य में से अयनांश घटा देने से निरयन सूर्य होता है अयनांश निकालना पहिले बता चुके हैं।

सौर मास की संक्रान्ति की तारीख