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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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१८२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

अध्याय ३६

सायन सूर्य जानने की स्थूल रीति

मासतारीखअंग्रेजी महीनासूर्य की संक्रांतिअंशगति कला
१ भाष२०जनवरीकुंभ१°६१'
२ फाल्गुन१९फरवरीमीन६०
३ चैत्र२१मार्चमेष५९
४ वैशाख२०अप्रैलवृष५९
५ ज्येष्ठ२१मईमिथुन५८
६ आषाढ़२१जूनकर्क५७
७ सावन२३जुलाईसिंह५७
८ भादों२२अगस्तकन्या५८
९ कुआँर२३सितम्बरतुला५८
१० कार्तिक२३अक्टूबरवृश्चिक६०
११ अगहन२३नवम्बरधनु५९
१२ पूस२२दिसम्बरमकर५९

यहाँ अंग्रेजी तारीख के अनुसार सायन सूर्य दिया है। इष्ट दिन का सायन सूर्य जानने की रीति—

चक्र में सायन सूर्य की संक्रान्ति और उसकी तारीख इष्ट दिन के समीप की खोजो और उससे इष्ट दिन का अन्तर निकालो। उसी के आगे सूर्य की गति दी है। अन्तर समय की गति स्थूल रूप से निकाल कर उसे चक्र में दिए हुए सायन सूर्य में जोड़ या घटा कर इष्ट दिन का सायन सूर्य जान सकते हो। चक्र में दिए हुए तारीख के पहले का समय हो तो घटाना पड़ेगा, आगे का हो तो जोड़ना पड़ेगा, तब इष्ट दिन का सायन सूर्य निकलेगा।

जैसे १८ मार्च का सायन सूर्य निकालना है। चक्र में देखा अपने इष्ट समय के समीप २१ मार्च दिया है। अब इष्ट दिन और चक्र की तारीख का अन्तर निकालना (चक्र की तारीख २१ मार्च—इष्ट तारीख १८ मार्च)=२१-१८=३ दिन का अन्तर आया। २१ मार्च के आगे गति ५९' दी है। १ दिन में सूर्य ५९' चलता है तो ३ दिन के अन्तर में =५९' × ३=१७७ कला=२°—५७' गति हुई। यह सूर्य की इष्ट काल तक की गति हुई। अर्थात् २१ मार्च के आगे सूर्य का अन्तर २—५७' हो गया। इस गति को चालन कहते हैं। अर्थात् सूर्य को इतना चलना पड़ेगा।

चक्र की तारीख से अपना इष्ट समय पहिले का है, इसलिए यह चालन घटाना पड़ेगा। जहाँ घटाना पड़ता है उसे चालन ऋण कहते हैं। जहाँ जोड़ना पड़ता है उसे चालन धन कहते हैं। इष्ट काल २१ मार्च के आगे का हो तो चालन धन होता

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