सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंविना पंचांग के तिथिक्रम : १-१
ये ७ चर करण है : (१) वव (२) वालव, (३) कोलव, (४) तैतिल (५) गर, (६) वणिज, (७) विष्टि ।
स्थिर करण ४ है :—(१) शकुनि, (२) चतुष्पद, (३) नाग (४) किस्तुज ।
स्थिर करण—शुक्ल परिव्रा को पूर्वार्द्ध में किस्तुज; उत्तरार्द्ध में वव (चर) अमावस्या, कृष्ण ३० को पूर्वार्द्ध में चतुष्पद उत्तरार्द्ध में नाग, कृष्ण १४ को पूर्वार्द्ध में विष्टि (चर) उत्तरार्द्ध में शकुनि ।
उदाहरण—सम्बत् २००० में श्रावण पूर्णिमा को करण जानना है । पूर्णिमा तक १५ तिथि=१५ X २=३०-१=२९÷७=शेष १=वव करण उत्तरार्द्ध में, इसके पूर्वार्द्ध में (इसके पहिले का) विष्टि करण होगा । १ तिथि में २ करण होते हैं ।
पहिले करण जानना का चक्र दे चुके हैं, उसके द्वारा किसी भी तिथि का करण सरलता से जान सकते हैं ।
(६) विना पंचाङ्ग को चन्द्र जानना
(इष्ट तिथि X २) X (कृष्ण पक्ष में ३५, शुक्ल पक्ष में ५) ÷ = लब्धि वर्तमान संक्रांति जिस राशि की हो उस राशि से लब्धि संख्या तक गिनो तो चन्द्र की राशि निकलैगी । गिनने में १२ से अधिक संख्या हो तो १२ घटा कर शेष अंक लेना ।
(१) जैसे सं० २००० वैशाख शुक्ल १२ को चन्द्र जानना है ।
तिथि १२ X २=२४+५ शुक्ल पक्ष के=२९÷५=लब्धि ५ ५) २९(५ लब्धि दशमी को वृष संक्रांति थी । वृष से लेकर लब्धि का अंक ५ तक २५ गिना तो कन्या आई । तो उस दिन कन्या का चन्द्र था । ४
(२) कार्तिक अमावस को चन्द्र जानना है । तिथि १५ X २=३०+३५ (कृष्ण पक्ष होने से)=६५÷५=१३ लब्धि । लब्धि १३ यह १२ से अधिक है तो १३÷१२=शेष १ तुला की संक्रांति कृष्ण चौथ को थी उससे १ गिना तो तुला का चन्द्र आया ।
(३) ज्येष्ठ पूर्णिमा सं० २००० को चन्द्र जानना है । तिथि १५ X २=३०+५ (शुक्ल के)=३५÷५=लब्धि ७ । मिथुन संक्रान्ति १२ तिथि को थी, मिथुन से ७ गिना-सातवां धनु आया, इस कारण इष्ट दिन को धनु का चन्द्र हुआ ।
दूसरी रीति—अमावस्या को सूर्य चन्द्र एक राशि पर रहते हैं तो जो सूर्य की राशि हो वही से सवा दो दिन चन्द्र एक राशि पर रहता है । तिथि में २५ दिन=३ का भाग दो । अर्थात् तिथि X ४ ÷ ९=जो लब्धि होगी, सूर्य की राशि से उतना गिनो तो चन्द्र की राशि जान होगी । जैसे वैशाख शुक्ल १२=१२ X ४ ÷ ९=१५÷९=२ लब्धि । सूर्य वृष का है तो वृष से लब्धि ५ तक गिना तो कन्या राशि आई । इस कारण चन्द्र की राशि कन्या हुई ।
सूर्य को संक्रांति जानना आगे बताया है ।