सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १
Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 198, कुल 288 में से
संदर्भ में पढ़ें१६० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड
उसे अश्विनी से गिन कर इष्ट नक्षत्र कहना। पक्ष के दिन जोड़ने के लिए कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को गिनो और आगे गिनना आरम्भ कर इष्ट तिथि तक गिनना चाहिए।
जैसे ऊपर के उदाहरण में गत मास कुंभार है। इसे कार्तिक से गिना तो यह कुंभार १२ वां महिना हुआ। १२ x २ = २४ + गततिथि (कुंभार पूर्णिमा से कार्तिक अमावस्या तक १५ + चौथे के ४ दिन) + १ = २४ + १५ + ४ + १ = ४४ ÷ २७ = शेष १७ = १७ वां नक्षत्र अनुराधा होता है। इस कारण इष्ट तिथि को अनुराधा नक्षत्र आया। पंचांग में उस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र है। इसमें भी कभी २ एक नक्षत्र का अन्तर पड़ जाता है।
दूसरा उदाहरण—माघकृष्ण १० को सम्बत् २००० में नक्षत्र जानना है। गत मास पूस हुआ। कार्तिक से पूस तक = ३ मास x २ = ६ + गत दिन माघ कृष्ण के १५ + माघ शुक्ल के १० दिन + १ = ६ + १५ + १० + १ = ३२ ÷ २७ = शेष ५ = मृगशिर। पंचांग में कुछ देर उपरान्त रोहिणी था, १ का अन्तर पड़ गया। तिथि के घट बढ़ जाने से प्रायः १ दिन का कभी २ अन्तर पड़ जाता है।
(३) तीसरी रीति अमावस्या को सूर्य और चन्द्र एक साथ रहते हैं। यदि सूर्य नक्षत्र ज्ञात हो तो अमावस्या से आगे जितने दिन (इष्ट दिन तक) हों गिनो, उतने दिन सूर्य नक्षत्र से गिनने पर अपना दिन नक्षत्र (चंद्र नक्षत्र) आयगा।
आकाश में भी यदि चंद्र दिखता है तो चंद्र के समीप जो नक्षत्र होगा आकाश में देखकर भता दो। उस दिन वही नक्षत्र होगा।
(४) बिना पंचाङ्ग के योग जानना
सूर्य का जो नक्षत्र हो मालूम करो। सूर्य नक्षत्र से पुष्य नक्षत्र तक दोनों नक्षत्रों को मिलाते हुए गिनो, फिर जिस दिन का योग जानना है उस दिन के चन्द्र नक्षत्र तक अवन से गिनो। दोनों संख्या जोड़ कर २७ का भाग दो, जो शेष बचे वह संख्या योग की होगी।
जैसे सं० २००० में श्रावण शुक्ल १० को जानना है। उस दिन सूर्य आश्लेषा नक्षत्र पर है और इष्ट दिन (दशमी) को ज्येष्ठा नक्षत्र है। अब पुष्य नक्षत्र से सूर्य के आश्लेषा नक्षत्र तक गिना = यह दूसरा नक्षत्र है = २ संख्या हुई। फिर श्रावण से इष्ट नक्षत्र ज्येष्ठा तक गिना २३ आये। = २३ + २ = २५ ÷ २७ = शेष २५ रहे, २५ वां योग ब्रह्म योग आया, पंचांग में २६ वां योग ऐन्द्र है। नक्षत्रों के घट बढ़ जाने से इसमें भी कभी-कभी एक दिन का अन्तर पड़ जाता है।
(५) बिना पंचाङ्ग के करण जानना
शुक्ल प्रतिपदा से इष्ट तिथि को गिन कर दूना करो और १ घटा कर ७ का भाग दो तो ये चर करण निकलेंगे। वह करण तिथि के उत्तरार्द्ध में मिलेगा। पूर्वार्द्ध में उसके पहिले का करण जानना।