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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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बिना पंचांग के तिथिज्ञान : १७९

सम्वत्‌ राजा सम्वत्‌ राजा सम्वत्‌ राजा सम्वत्‌ राजा सम्वत्‌ राजा

१९२३ शनि. १९४३ सोम. १९६३ रवि. १९८३ रवि. २००३ वुध.

१९२४ शुक्र. १९४४ शुक्र. १९६४ शुक्र, १९८४ रवि. २००४ रवि.

१९२५ वृध, १९४५ गुरुः १९६५ गुर. १९८५ गुरु. २००५ शनि.

१९२६ रवि १९४६ सोम. १९६६ सोम. १९८६ बुध, २००६ बुध,

१९२७ शनि, १९४७ शुक्र. १९६७ रवि. १९८७ सोम. २००७ रवि.

१९२८ बुध. १९४८ गुरु. १९६८ शुक्र. १९८८ शुक्र. २००८ शनि,

१९२९ सोम. १९४९ मंगल १९६९ मंगल. १९८९ वुध, २००९ बुध.

१९३० शनि. १९५० रवि. १९७० सोम. १९९० सोम. २०१० सोम.

१९३१ गुरु, १९५१ शनिः १९७१ शुक्र. १९९१ शुक्र २०११ रवि.

१९३२ बुध, १९५२ वुध. १९७२ मंगल १९९२ गुरु.

१९३३ रवि. १९५३ रवि. १९७३ सोम. १९९३ मङ्गल

१९३४ शुक्र, १९५४ शनि. १९७४ शुक्र. १९९४ सोम.

१९३५ बुध. १९५५ बुध. १९७५ शुक्र, १९९५ शुक्र

१९३६ रवि. १९५६ मंगल १९७६ मंगल १९९६ बुध,

१९३७ शनि. १९५७ शनि. १९७७ रवि. १९९७ सोम.

११३८ वुध. १९५८ गुरु, १९७८ शनिः १९९८ शुक्र.

१९३९ सोम. १९५९ बुध १९७९ बुध. १९९९ मंगल. `

१९४० रवि. १९६० रवि १९८० रवि. २००० सोम.

१९४१ शुक्र १९६१ शुक्र, १९८१ शनि. २००१ शनि.

१९४२ मंगल १९६२ बुधः १९८२ बुध. २००२ गुरु.

३-बिना पंचांग के नक्षत्र जानना

किसी चान्द्र मास की पूर्णिमा को जो नक्षत्र होता है पहिले बता चुके हैं । पूणिमा

से आगे की तिथि तक गिनो, उस संख्या को गत पूर्णिमा की नक्षत्र संख्या में जोड़ दो

अर्थात्‌ पूणिमा को जो नक्षत्र हो उसके आगे इष्ट तिथि की संख्या तक गिनो तो इष्ट

नक्षत्र निकल आयगा ।

( १ ) जैसे सम्बत्‌ २००० में कातिक शुक्ल चतुर्थी को नक्षत्र जानना है.। इसके

पहिले कुँआर पूर्णिमा को अश्विनी नक्षत्र होता है । कुंआर पूणिमा से कातिक अमावस्या

तक १५ दिन और कातिक शुक्ल चौथ तक गत दिन १५+ ३=१८ दिन हुए । अब

पूर्णिमा का नक्षत्र अश्विनी से गिना तो १५ वां नक्षत्र ज्येष्ठा आया । पंचांग में भी

उस दिन ज्येष्ठा दिया है ।

(२) दूसरी रीतिन्कातिक कुष्ण १ से इष्ट मास तक गिन कर दूना करो ओर

बीते पक्ष के दिन जोड़ कर १ ओर मिला दो और २७ का भाग दो । शेष जो बचे