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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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१७८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड

चैत्र से भादों की अमावस तक=१ मास X १३=१३ भादों की अमावस से भादों की पूर्णिमा तक १५ दिन, आगे कातिक बदी १४ तक=१४ दिन। ७३+१४+१४ दिन=३६३ दिन=७-शेष १३ दिन। वर्ष के राजा सोमवार से १३ गिना तो दूसरा मंगलवार आया। इस कारण उस दिन मंगलवार था।

(३) सम्बत् २००१ राजा शनि। माघ कृष्ण १० का दिन जानना है।

चैत्र शुक्ल १ से पूस की अमावस तक=१ मास X १३=१३ पूस की अमावस से पूस की पूर्नो तक=१५ दिन। पूस की पूर्णिमा से माघ कृष्ण १० तक=१० दिन। १३+१५+१०=३८=शेष ३३ दिन। वर्ष का राजा शनि से गिना चौथा दिन मंगल बार का दोपहर आया। आधा दिन बचा था इतने मण्ट हुआ उस दिन बसो आये दिन तक थी।

(४) सम्बत् २००१ राजा शनि। आषाढ़ शुक्ल १३ का दिन जानना है।

चैत्र शुक्ल १ से आषाढ़ कृष्ण ३० तक=३ मास X १३=४३ आषाढ़ ३० से आषाढ़ शुक्ल १३ तक=१३ दिन। ४३+१३=१७३=७ शेष ३॥ दिन ३ राजा शनि से चौथा बार मंगलवार हुआ। आधा दिन आया है अर्थात् १३ तिथि उस दिन आये दिन तक ही थी।

बहूधा दिन के किसी भी समय पर तिथि का अन्त हो जाता है। तिथि की हानि या वृद्धि भी हो जाती है, जिसके कारण बार में भी कभी-कभी एक दिन का अन्तर पड़ जाता है।

आगे वर्ष के राजा का चक्र कई वर्षों का दिया है जिससे कहीं खोजना न पड़े।

कई वर्षों के वर्ष के राजा का चक्र

सम्बत्राजाबारसम्बत्राजासम्बत्राजासम्बत्राजासम्बत्राजा
१८४८सोम.१८६९शनि.१८८४बुध.१८९७शुक्र.१९१०शनि.
१८४९शुक्र.१८७०शुक्र.१८८५रवि.१८९८बुध.१९११बुध.
१८५०शुक्र.१८७१मंगल१८८६शनि.१८९९सोम.१९१२सोम
१८५१मंगल१८७२सोम.१८८७गुरु.१९००शुक्र.१९१३रवि.
१८५३शुक्र.१८७३शुक्र.१८८८मंगल१९०१मंगल१९१४गुरु.
१८५४बुध.१८७४मंगल१८८९सोम.१९०२शनि.१९१५मंगल
१८५७बुध.१८७६शुक्र.१८९०शुक्र.१९०३शनि.१९१६सोम.
१८५८रवि.१८७७बुध.१८९१गुरु.१९०४बुध.१९१७शुक्र.
१८५९शनि१८७८मंगल१८९२सोम.१९०५मंगल१९१८गुरु.
१८६०गुरु.१८८०शनि.१८९३शुक्र१९०६रवि.१९१९सोम.
१८६१बुध.१८८१बुध.१८९४गुरु.१९०७गुरु.१९२०शुक्र.
१८६२सोम.१९०२रवि.१८९५सोम.१९०८बुध.१९२१गुरु.
१८६७गुरु.१८८३शनि.१८९६शनि.१९०९रवि.१९२२मंगल