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सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

सचित्र ज्योतिष शिक्षा (प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड) भाग १

Sachitra Jyotisha Shiksha (Prarambhika Gyan Khand) Vol 1

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished288 पृष्ठ

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ज्योतिष शास्त्र में विश्वास : ३

है। इस लिए इन सूर्य की राशियों में जिस बालक का जन्म होगा उसी के अनुसार शरीर में प्रभाव बढ़ेगा।

सूर्य का प्रभाव पौधों और वृक्षों पर भी पड़ता है। वर्षा ऋतु में इस्लिया अधिक उत्पन्न होती है और कृषि को हानि पहुँचाती है। बुखार का प्रकोप भी समयानुसार बढ़ता है। इस प्रकार समस्त जड़ चैतन्य पर सूर्य का प्रभाव पड़ता है। सब ग्रहों में सूर्य बड़ा बलवान् है इसी कारण सूर्य को मनुष्य की आत्मा कहा है।

जहाँ जो जिस परिस्थिति में उत्पन्न हुआ है वही उसका प्राकृतिक स्वभाव बन जाता है। इसी प्रकार विशेष ग्रह स्थिति और समय से उत्पन्न बालक का विशेष स्वभाव बन जाता है। जैसे ठंडी प्रकृति में उत्पन्न हुए वृक्ष को यदि उष्ण प्रकृति के स्थान में लगाओ तो नहीं होगा, यदि हुआ भी तो शक्ति हीन, रोगी होगा। कारण कि ठंडे वातावरण में उत्पन्न होने से उसका जीवन भी जन्म समय के वातावरण से प्रभावित होकर वहाँ की प्रकृति का स्वभाव ग्रहण करता है। इसी कारण भिन्न-भिन्न स्थिति में उत्पन्न हुए बालकों की प्रकृति भी भिन्न-भिन्न हो जाती है। किसी विशेष ग्रह का प्रभाव भिन्न-भिन्न मनुष्यों पर भिन्न-भिन्न प्रकार से होता है।

Dr. Maurice Faure (डाक्टर मारिस फाउर) ने सन् १९२७ में फ्रेंच अकादमी के समक्ष डाक्टरी और ज्योतिष सम्बन्धी रिकार्ड उपस्थित कर बताया था कि सूर्य के धब्बे भी सूर्य के आस पास एक ही दिशा में परिक्रमा करते हैं। २५६ दिन में उनकी एक परिक्रमा होती है। जब धब्बे दिखाई देते हैं तो उस समय साधारण मृत्यु संख्या से दुगुनी मृत्यु संख्या हो जाती है। इसका पूरा प्रमाण भी उपस्थित किया गया था।

चन्द्र का प्रभाव सूर्य से दूसरे नम्बर का है। इसका महत्तम पृथ्वी से अन्तर २५२९४८ मील है। यह पृथ्वी के सब ग्रहों से समीप होने के कारण अधिक प्रभावित करता है। चन्द्र की भी आकर्षण शक्ति समुची पृथ्वी पर पड़ती है, जिससे जड़ चैतन्य सभी प्रभावित हो रहे हैं। प्रत्यक्ष में देखा जाता है कि चन्द्र की घटावृद्धी के कारण समुद्र की लहरों पर प्रभाव पड़ता है। पूर्णिमा को ज्वारभाटे का पूर्ण प्रभाव देखने में आता है। जब समुद्र सरीखे जड़ पदार्थ पर भी इतना प्रभाव पड़ता है कि जल राशि को अपनी ओर आकर्षित कर बड़ी-बड़ी लहरों का उत्पादक होता है तो यह इतर प्राणियों पर क्यों न प्रभाव करेगा ?

मनुष्य के चित्त पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ता है, इसी कारण चन्द्रमा को मनुष्य का मन कहते हैं। बहुधा देखा जाता है कि चन्द्र के घटाव वृद्धाव का प्रभाव पागल पर अधिक पड़ता है। इसी कारण पागलपन को चन्द्र के नाम से अंग्रेजी में लूनेसी Lunecy कहते हैं। सर इसाक न्यूटन Isaac Neutan ने सिद्ध कर बताया है कि पागलपन चन्द्र से सम्बन्धित है और मानसिक दशा पर चन्द्र का बहुत प्रभाव पड़ता है।